पटना
बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए आरक्षण का मानक तय हो गया है। पंचायती राज विभाग द्वारा तय गाइडलाइन के आधार पर राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग अध्ययन करेगा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल लगभग 122 जातियों की सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन होगा। इसके लिए जल्द ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग से जुड़े गांवों और शहरों में सर्वे शुरू होगा।
ईबीसी आयोग निर्धारित मानक पर सर्वें करा कर पंचायत चुनाव में ईबीसी प्रतिनिधियों लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने की अनुशंसा करेगी। पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (एनेक्सर-1) के लिए अधिकतम 50 फीसदी ही आरक्षण देना है। पिछले दिनों पंचायती राज विभाग और ईबीसी आयोग के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। आयोग ने विभाग से अध्ययन के लिए सहायता मांगी थी। पंचायती राज विभाग ने आयोग को भरोसा दिया है कि डीएम सहित जिलों के संबंधित विभागीय अधिकारियों को पत्र भेज कर आयोग को मदद दिलायेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार के पंचायत चुनावों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के पहले त्रिस्तरीय जांच (ट्रिपल टेस्ट) अनिवार्य है। इसमें पहली शर्त है कि किसी भी स्थिति में आरक्षण का दायरा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। दूसरा, अत्यंत पिछड़ा वर्ग की किन-किन जातियों को आरक्षण की वास्तव में जरूरत है। तीसरा, इसके लिए समर्पित आयोग हो, जो समयसीमा में अध्ययन कर रिपोर्ट दे। सरकार ने पहले ही ईबीसी आयोग को अध्ययन के लिए समर्पित आयोग घोषित कर दिया है।
एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही ओबीसी को आरक्षण
वर्तमान में उपलब्ध जनगणना पर राज्य की कुल आबादी में जितनी आबादी एससी- एसटी की होगी, इन वर्ग को उतना प्रतिशत आरक्षण देना है। एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया जा सकता है। बीते पंचायत चुनाव में यहां पिछड़ा वर्ग को 20% आरक्षण दिया गया था। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में भी ईबीसी को आरक्षण लगभग पिछले चुनाव की तरह ही मिलेगा।
अत्यंत पिछड़ा वर्ग में 122 जातियां
अत्यंत पिछड़ा वर्ग में लगभग 122 जातियां हैं। गाइडलाइन के आधार पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायतों में ओबीसी की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को देगा। सामान्य प्रशासन विभाग से रिपोर्ट पंचायती राज विभाग को मिलेगी। इसके बाद यह रिपोर्ट निर्वाचन विभाग को भेजी जायेगी। राज्य स्तर पर आरक्षण का दायरा तय नहीं होगा, बल्कि पंचायत ही मानक रखा गया है। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या बढ़ने की स्थिति में ईबीसी के लिए आरक्षित पंचायतों की संख्या में भी वृद्धि तय है।
अत्यंत पिछड़ा वर्ग में प्रमुख जातियां
कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू, नाई आदि
पंचायतों के नये परिसीमन के बाद होगा चुनाव
राज्य में वर्तमान में 8049 ग्राम पंचायत हैं। नये परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या 12500 हजार से अधिक होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन विभाग को परिसीमन करना है।
● आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।
● पंचायतवार अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी का आकलन।
● ईबीसी के परिवारों की आर्थिक स्थिति।
● संसद, विधानसभा, नगर निकाय व पंचायतों में ओबीसी का वर्तमान प्रतिनिधित्व।
● अत्यंत पिछड़ा वर्ग का सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति।


