भोपाल
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव का कहना है कि मध्य प्रदेश में अगले दो वर्ष में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 50 से अधिक हो जाएगी। योग्य डॉक्टर मिलेंगे लेकिन अभी जागरूकता भी बढ़ाने की जरूरत है। कोशिश है कि सरकारी सिस्टम पर लोगों का भरोसा बढ़े। यह आवश्यक है कि आदिवासी क्षेत्रों में भी बीमार, पीड़ित डाक्टर या अस्पतालों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री डा. यादव का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब, युवा, किसान और महिला के कल्याण पर फोकस किया है। यही हमारा लक्ष्य है कि गरीब को रोजगार मिले, युवाओं को काम मिले, महिलाओं को सम्मान मिले और किसान के घर समृद्धि आए।
भाजपा सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कोविड के कारण वह प्रभावित हुआ। अब क्या तैयारी है?
हम वर्ष 2026 को किसान वर्ष के रूप में मना रहे हैं। उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर उपज की खरीदी कर रही है। जो उपज एमएसपी पर नहीं लेते, उस पर भी किसानों को भावांतर योजना के जरिये लाभ पहुंचा रहे हैं। इस वर्ष मध्य प्रदेश ने 104 लाख टन गेहूं का उपार्जन किया है, जो देश में रिकॉर्ड है। गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश अब पंजाब से आगे निकलने की तैयारी में है। प्रदेश में छह लाख कपास उत्पादक किसान हैं। अग्रेजों के राज में कई मिलें थीं लेकिन बाद में बंद हो गईं। अब हम घर-घर हथकरघा खुलवा रहे हैं। गुना के गुलाब दुनिया भर में निर्यात हो रहे हैं, तो मालवांचल फूलों की खेती का हब बन गया है। हार्टीकल्चर- फ्लोरीकल्चर जैसे क्षेत्रों में भी किसान काम कर रहे हैं। दुग्ध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। प्रति लीटर दस रुपये दाम बढ़ गए। जलाशयों की संख्या बढ़ने से मत्स्य उत्पादन बढ़ा है।
केन-बेतवा प्रोजेक्ट के मुआवजे को लेकर कांग्रेस की सक्रियता पर क्या कहेंगे?
कांग्रेस ने किसानों के साथ अन्याय किया। कांग्रेस ने नर्मदा नदी के माध्यम से जनकल्याण को प्राथमिकता नहीं दी। नर्मदा के बांध बनने में बाधा डाली, नाटक किए। अब केन-बेतवा नदी जोड़ो में नाटक कर रही है। कांग्रेस चाहती ही नहीं कि किसान खुशहाल हों। कांग्रेस के मुख्यमंत्री-मंत्री कहते थे नर्मदा नीचे है, मालवांचल ऊपर, तो पानी मालवांचल तक कैसे पहुंचेगा? अब देख लीजिए हमने कर दिखाया। उज्जैन-इंदौर से लेकर पूरा मालवा नर्मदा जल का उपयोग कर रहा है। लाड़ली बहना जैसी योजना अब चुनौती बनती जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में चुनाव से पहले विपक्ष अधिक राशि देने की घोषणा कर रहा है?
कांग्रेस हो या उसके सहयोगी दल, जब बोले तब झूठ ही बोले। कांग्रेस ने कहा था कि देश का बंटवारा नहीं होने देंगे। 1971 में कहा था कि गरीबी दूर कर देंगे। क्या हुआ, परिणाम सामने हैं। वर्ष 2003 तक प्रदेश में कांग्रेस ने राज किया लेकिन गरीबी दूर करने पर सोचा भी नहीं। लोकतंत्र की लड़ाई की बात कहकर राजतंत्र समाप्त करवाया और अब एक ही परिवार राज करना चाहता है। कांग्रेस चुनावी वादे करके, फिर पलट जाती है। इसके विपरीत देखिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के दुश्मनों को उनके घर में भी नहीं छोड़ेंगे। तो सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक की। देश में अब आतंकी घटनाएं बंद हो गई हैं। इकानामी पूरी बदल गई है। भाजपा की कथनी और करनी का उदाहरण भव्य श्रीराम मंदिर है, जिसका हिंदू- मुस्लिम सभी ने स्वागत किया। कांग्रेस के राज में हमेशा दंगे होते थे। कांग्रेस हो या उसके साथी, सब एक थाली के चट्टे-बट्टे हैं।
मध्य प्रदेश में खेल सुविधाओं को और बढ़ाने की आवश्यकता है। इंदौर जैसे शहर में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम नहीं है। खेल प्रतिभाएं आगे कैसे बढ़ेंगी?
मध्य प्रदेश एकमात्र राज्य है, जहां खेल पाठ्यक्रम का हिस्सा है। खेल शिक्षक, कोच की तरक्की के रास्ते तैयार किए गए हैं। सहायक प्राध्यापक और प्राध्यापक बनाए जा रहे हैं। हमारे पास शूटिंग एकेडमी है। हॉकी में प्रदेश की महिला- पुरुष दोनों टीमों की खेल में भागीदारी बढ़ी है। कुश्ती-मलखंभ में खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रदेश में 11 खेल एकेडमी चल रही हैं। खेल सुविधाएं हमारे यहां बढ़ी हैं। यह बात अलग है कि समाज का लगाव अब भी क्रिकेट के साथ है। ओलिंपिक, एशियाड या कामनवेल्थ, हर प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश की भागीदारी बढ़ी है।
आपकी सरकार के तीन साल पूरे होने वाले हैं। इस दौरान कई योजनाएं और प्रयास किए गए। इनमें से आपका सबसे प्रिय ड्रीम प्रोजेक्ट कौन-सा है?
कोई एक योजना ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि मेरा ड्रीम है कि मध्य प्रदेश का सामान्य नागरिक महसूस करे कि सरकार उसके जीवन को आसान बनाने के लिए काम कर रही है। उज्जैन का सिंहस्थ, श्रीराम वनगमन पथ, श्रीकृष्ण पाथेय, औद्योगिक निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य, यह सब मेरे विकसित मध्य प्रदेश के सपने का हिस्सा है। मेरा सबसे बड़ा सपना है कि मध्य प्रदेश विकास के साथ अपनी संस्कृति और पहचान को लेकर भी देश में अग्रणी बने।
क्या कोई ऐसा निर्णय या मौका रहा, जो आपके लिए सबसे कठिन या चुनौतीपूर्ण रहा और आपने उसका सफलतापूर्वक मुकाबला किया?
मुख्यमंत्री के रूप में हर नया दिन नई चुनौतियां लेकर आता है। कभी कानून-व्यवस्था, कभी प्राकृतिक आपदा, कभी प्रशासनिक चुनौती और कभी किसी वर्ग की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। मेरा सिद्धांत है कि कठिन निर्णय से भागना नहीं है, बल्कि तथ्यों, कानून और जनहित के आधार पर निर्णय लेना है। चुनौती कितनी भी बड़ी हो, अगर नीयत साफ हो तो समाधान का रास्ता निकलता है।
सनातन धर्म को लेकर आपने काफी नवाचार किए। क्या यह सही है कि आप हिंदुत्व का हार्डकोर चेहरा बनने से खुद को बचाते रहे हैं?
मैं किसी छवि की राजनीति नहीं करता। मेरी आस्था सनातन में है और सनातन का मूल संदेश ही सबको साथ लेकर चलने का है। हमने मंदिरों के विकास, धार्मिक स्थलों की सुविधाओं, श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों के विकास के साथ लोक परंपराओं को भी महत्व दिया है। मेरे लिए सनातन का अर्थ है- संस्कार, सेवा, समरसता और सबके कल्याण का भाव। आप बच्चों के बीच जाकर उन्हें पढ़ा रहे हैं।
राजनीति में न आते तो क्या शिक्षक बनते?
बच्चों के बीच जाकर लगता है कि मैं भविष्य के मध्य प्रदेश से संवाद कर रहा हूं। राजनीति में नहीं आता तो शिक्षा के क्षेत्र में काम करना निश्चित रूप से अच्छा लगता। आज भी जब बच्चों के बीच जाता हूं, तो मुख्यमंत्री की भूमिका पीछे छूट जाती है। शिक्षक की भूमिका सामने आ जाती है।
सांदीपनि स्कूलों से उच्च शिक्षा तक कौशल विकास पर जोर है, लेकिन सरकारी स्कूलों में भवन और शिक्षक जैसी मूलभूत समस्याएं हैं। इसे कब तक ठीक किया जाएगा?
हम स्वीकार करते हैं कि जहां कमी है, उसे दूर करना हमारी जिम्मेदारी है। हमारा प्रयास है कि चरणबद्ध तरीके से अधोसंरचना और शिक्षकों की कमी दूर करें। हमारा लक्ष्य है कि गरीब परिवार का बच्चा भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल के साथ आगे बढ़े।
हर सरकार पर आरोप लगता है कि ब्यूरोक्रेसी नियंत्रण में नहीं है। आपको यह कितना सही या गलत तथ्य लगता है?
ब्यूरोक्रेसी सरकार का महत्वपूर्ण अंग है लेकिन अंतिम जवाबदेही निर्वाचित सरकार की होती है। मैं अधिकारियों को काम करने की पूरी स्वतंत्रता देता हूं, लेकिन परिणाम के लिए जवाबदेही भी तय करता हूं। जहां लापरवाही या निष्क्रियता मिलेगी, वहां सरकार कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगी।
गृह विभाग आपके पास है। माओवाद से मुक्ति बड़ी उपलब्धि है, लेकिन पुलिस में भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहते हैं। पुलिस भ्रष्टाचार से कब मुक्त होगी? क्या एसपी की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए?
माओवाद के खिलाफ हमारी पुलिस और सुरक्षा बलों ने असाधारण काम किया है। किसी अच्छे पुलिसकर्मी की मेहनत पर भ्रष्टाचार की एक घटना सवाल खड़ा करे, यह स्वीकार्य नहीं है। भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण है, जहां लगातार गंभीर लापरवाही मिलेगी, वहां जवाबदेही ऊपर तक तय करने में संकोच नहीं होगा।
मध्य प्रदेश को 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। फिर जीआइएस हो रही है। क्या लक्ष्य है? क्या उद्योगों में प्रदेश के निवासियों को प्राथमिकता मिलेगी?
बड़े-बड़े एमओयू ही नहीं, बल्कि निवेश जमीन पर उतरे, उद्योग शुरू हों और मध्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिले, यही हमारा लक्ष्य है। हमने निवेश नीतियों में रोजगार सृजन के प्रोत्साहन की व्यवस्था की है। हम चाहते हैं कि कंपनियां प्रदेश में निवेश करें तो स्थानीय प्रतिभा, उद्यमी और सप्लाई चेन भी उनसे जुड़ें। निवेश आएं, उद्योग लगें और रोजगार हमारे युवाओं को मिले, यही प्राथमिकता है।
निवेश की सबसे अधिक संभावनाएं किन क्षेत्रों में देखते हैं?
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से लेकर फार्मा, मेडिकल डिवाइस, टेक्सटाइल, आटोमोबाइल, आइटी, लाजिस्टिक्स और पर्यटन तक व्यापक संभावनाएं हैं। हम सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रानिक्स, ड्रोन जैसे नए क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रहे हैं। हमारी वर्ष 2025 की नीतियों में इन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन व्यवस्थाएं भी हैं।
पिछली जीआइएस में मिले लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों में से कितने धरातल पर उतरे और कितने रोजगार बने?
एमओयू और वास्तविक निवेश में अंतर होता है, इसलिए हमारी प्राथमिकता प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और रोजगार सृजन पर है। यही हमारी सफलता का असली पैमाना होगा। अब तक 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश धरातल पर उतर चुका है।
राजस्व महाभियान, सेवा पखवाड़ा और अब मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान, इसके पीछे क्या सोच है? क्या गवर्नेस में सुधार दिखाई दे रहा है?
सरकार का मूल्यांकन इससे होना चाहिए कि आम आदमी का काम कितनी आसानी से होता है। ऐसे अभियानों का उद्देश्य है कि लोगों को कार्यालयों के चक्कर न लगाना पड़े। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान भी इसी का विस्तार है। हमारा सोच स्पष्ट है, सरकार जनता पर विश्वास करे और जनता को भी सरकार पर विश्वास हो।
क्या सुशासन की राह में सबसे बड़ी बाधा ब्यूरोक्रेसी की निष्क्रियता है?
प्रदेश के अधिकतर अधिकारी-कर्मचारी मेहनत से काम कर रहे हैं, लेकिन कोई अधिकारी जनता से दूरी बनाता है, कार्यालय से बाहर नहीं निकलता या फाइलों को अनावश्यक रोकता है तो यह सुशासन के खिलाफ है। मैंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा है कि फील्ड में जाइए, जनता से मिलिए और समस्या को मौके पर समझिए और सुलझाइए।
संभागीय स्तर पर एसीएस और एडीजी स्तर के अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन और निरीक्षण की जिम्मेदारी देने से क्या बदलाव आया?
इसका सबसे बड़ा लाभ है कि शासन की निगरानी केवल मंत्रालय तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संभाग स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी सीधे जिम्मेदारी लेते हैं। इससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समस्याओं की जानकारी तेजी से मुख्यमंत्री कार्यालय और सरकार तक पहुंचती है। मेरा मानना है कि जो अधिकारी मैदान में जाएगा, वही जमीन की वास्तविकता समझेगा।


