रायपुर
बच्चों के सर्वांगीण विकास, उनके अधिकारों की सुरक्षा और एक संवेदनशील पारिवारिक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से धमतरी में ‘समझदार पालक-सशक्त प्रदेश’ विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल पर आयोजित इस कार्यशाला में समाज, जनप्रतिनिधियों और 40 से अधिक अभिभावकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
सुरक्षित बचपन और बेहतर पेरेंटिंग पर मंथन
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के दो दिवसीय प्रवास के दौरान रूद्री रोड स्थित परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और व्यक्तित्व विकास पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यशाला में अभिभावकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से प्रभावी संवाद के गुर सिखाए गए।
अपनों के लिए देवकी, भटकते बच्चों के लिए यशोदा बनें
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की पहली सीढ़ी और जिम्मेदारी उनके माता-पिता हैं। अपने बच्चों के लिए तो हर माँ 'देवकी' होती है, लेकिन समाज का दायित्व है कि राह से भटके और बेसहारा बच्चों के लिए 'यशोदा' बनकर भी मिसाल कायम करें।
रायपुर की मनोवैज्ञानिक डॉ. गार्गी पांडे ने बताया कि माता-पिता का आचरण बच्चों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य की नींव रखता है। उन्होंने बच्चों के बदलते व्यवहार को समझकर उनके साथ दोस्ताना संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक सुझाव दिए।
बच्चों के कानूनी अधिकार की विशेषज्ञ सु दिव्यांशी शर्मा ने बच्चों के चार मूलभूत अधिकारों और बाल संरक्षण आयोग की शक्तियों से अभिभावकों को अवगत कराया। नगर निगम महापौर ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम संस्कारित और स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने अभिभावकों से बच्चों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, बाल कल्याण समिति के सदस्यों और प्रबुद्ध नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


