मुंबई
24 अप्रैल का दिन भारतीय शेयर बाजारों के लिए ब्लैक फ्राइडे साबित हुआ। लगातार तीसरे दिन गिरावट झेलते हुए बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स लगभग 1000 अंकों की गिरावट के साथ 76,664.21 पर और निफ्टी 275.10 अंकों की गिरावट के साथ 23,897.95 पर बंद हुआ। निफ्टी पर सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में हैं। सबसे ज्यादा 5 प्रतिशत निफ्टी आईटी टूटा है। फार्मा इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत और हेल्थकेयर व रियल्टी इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आए हैं।
बाजार की गिरावट में निवेशकों के 4.90 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। गुरुवार, 23 अप्रैल को मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,66,39,864.88 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को बाजार बंद होने पर यह घटकर 4,61,49,758.18 करोड़ रुपये पर आ गया। यानि कि 4,90,106.7 करोड़ रुपये की कमी।
शुक्रवार को सेंसेक्स लाल निशान में 77,483.80 पर खुला। फिर पिछली क्लोजिंग से 1260.13 अंकों तक लुढ़ककर 76,403.87 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,100.55 पर खुला और फिर पिछली क्लोजिंग से लगभग 359.4 अंक गिरकर 23,813.65 के लो तक गया।
क्यों फिसल रहा है बाजार
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत रुकने से कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 105.97 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से माहौल और अनिश्चित हो गया है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में लगातार सेलर बने हुए हैं। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को उन्होंने 3,254.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
रुपये में जारी गिरावट भी एक वजह है। शुक्रवार को घरेलू मुद्रा में लगातार पांचवें सत्र में गिरावट रही।रुपया 22 पैसे गिरकर 94.23 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव कायम है। वैश्विक बाजारों की कमजोरी भी भारतीय बाजारों को प्रभावित कर रही है। अमेरिकी बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए। भारत के अलावा कई अन्य एशियाई बाजारों में भी शुक्रवार को गिरावट है। जकार्ता कंपोजिट 3 प्रतिशत गिरा है। शंघाई कंपोजिट, सेट कंपोजिट में भी गिरावट है। हालांकि निक्केई, हेंग सेंग और ताइवान वेटेड हरे निशान में हैं।


