बिलासपुर (mediasaheb.com)| फिल्म “धुरंधर” ये फिल्म इस तथ्य को मजबूती देती है कि भारत का सिनेमा अब वैश्विक स्तर का है , उसका कथानक भारत की सीमाओं से बाहर का भी हो सकता है। पाकिस्तान एक ऐसा देश है , जहां एक देश के अंदर अनेक सत्ताएं है , पूरा बलोचिस्तान, नॉर्थ ईस्ट फ्रंटीयर स्टेट इत्यादि में पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार की कोई सत्ता नहीं है , हर जगह स्थानीय कबीले , माफिया , उग्रवादियों का कब्जा है।
पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची भी इस से अछूती नहीं है। ड्रग , गैर कानूनी हथियार, आतंकवाद और कट्टर मजहब जुनून वाले का एक अजीब सा मिला जुला समाज वहां रहता है।भारतीय जासूस की भूमिका रणवीर सिंह ( हमजा बलोच)में है तो अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत बलोच का यादगार किरदार निभाया है। संजय दत्त( एस पी चौधरी) की फिल्म में एंट्री लेट होती है किन्तु वो पूरे परदे पर मानो छा जाते है।
एक पात्र जिसकी चर्चा मीडिया नहीं कर रहा , वो है बेनजीर की पार्टी के स्थानीय नेता नाबिल गबोल , इसका रोल राकेश बेदी जी ने बहुत ही सहजता से निभाया है, हम उन्हें धारावाहिक “ये जो है जिंदगी” के राजा से लेकर अब तक फिल्मों में छोटे किन्तु प्रभावशाली हास्य कलाकार के रूप में जानते है , किन्तु इस फिल्म में आप उन्हें एक शातिर राज नेता के रूप में देखते है, बहुत ही उम्दा अभिनय।
फिल्म की एडीटिंग बहुत ही सधी हुई है, आप को फिल्म में कही भी बोरियत नहीं लगती , सब कुछ एक के बाद एक बहुत तेजी से बदलता है। फिल्म सत्य पर आधारित है ,
पाकिस्तान , भारत विरोधी ताकतों का सब से भरोसे में भरोसेमंद ठिकाना है। फिल्म में गीतों को जबरदस्ती मानो ठूसा गया है, ये फिल्म , बिना गानों के भी बहुत उम्दा बन सकती थी। फिल्म की जान रणवीर सिंह नहीं , अक्षय खन्ना है रहमान डकैत बलोच की भूमिका में एक शातिर , मक्कार खलनायक… इस में अस्सी और नब्बे के दशक वाली हिन्दी फिल्मों फार्मूला नहीं है ,जिस में खलनायक को उसकी स्थिति के लिए गरीबी या समाज को जिम्मेदार ठहरा कर उसका महिमामंडन (Glorification) किया जाता था। इस में जो जैसा है ,वो वैसा ही है परदे पर । बलोचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए चल रही लड़ाई भी फिल्म की पृष्ठभूमि में है , मुख्य विषय नहीं।
मोदी जी के आने के पहले के कमजोर भारत की छवि , दर्शकों को सोचने में विवश करती है कि हमारी विदेश और सामरिक नीति कितनी गलत थी , शत्रु हम पर हावी था । सब कुछ वही है केवल निर्णय लेने की क्षमता ने अब सब कुछ बदल दिया 26/11/ के मुंबई आतंकी हमले के बाद करांची में बैठा आई एस आई का मुखिया मेजर इकबाल( मनोज रामपाल) कहता है( इस फिल्म में )
“हमें लगा कि इसके बाद इंडिया कुछ करेगा , पर ये तो डरपोक निकले” पर उस बदलाव को भी दर्शक महसूस करता है जो मोदी जी के आने के बाद आया है फिल्म के अंत में इसे कहा गया है “अब भारत अपने दुश्मनों को घर में घुस कर मारता है” फिल्म में बहुत ज्यादा हिंसा दिखाई गई है ,इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी ,उसे अप्रत्यक्ष भी दिखाया जा सकता था फिल्म निश्चित ही बहुत शानदार है , एक अलग विषय पूरी फिल्म पाकिस्तान के करांची शहर की कहानी है। हमारी ओर से दस में से आठ
डॉ. संजय अनंत ©


