डॉक्टरों को एआई के बारे में अपना ज्ञान बढाना चाहिए दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय थायराइड सम्मेलन मेंं डॉ. सी. पलानीवेलु की सलाह
पुणे,(mediasaheb.com) | “भविष्य का चिकित्सा क्षेत्र बेहद चुनौतीपूर्ण होगा. आधुनिक तकनीक के युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस क्षेत्र में कई बदलाव लाएगी. रोबोटिक सर्जरी से आगे बढकर डॉक्टरों को अब एआई के बारे में अपना ज्ञान बढाना चाहिए. साथ ही, इस क्षेत्र में सभी सर्जरी एआई के माध्यम से की जाएँगी. यह कहना मुश्किल है कि अगले ५ वर्षों में और कितने बदलाव होंगे. लेकिन डॉक्टरों को इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए और अपने क्षेत्र में नई तकनीकों और कौशलों को सीखकर अपना काम करना चाहिए. यह विचार डॉ.बी.सी. रॉय पुरस्कार विजेता और लेप्रोस्कोपी के जनक डॉ. पलानीवेलु ने रखे.
श्री सरस्वती कराड अस्पताल, कोथरुड और एमआईएमईआर मेडिकल कॉलेज, एमआईसीई एमआईटी पुणे, डॉ. भाऊसाहेब सरदेसाई तलेगांव ग्रामीण अस्पताल, तलेगांव दाभाडे द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय थायराइड सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे.
यहां पर बैंकॉक, थाईलैंड से डॉ. अंगकून अनुवोंग और बार्सिलोना, स्पेस से पाब्लो मोरेनो लोरेंटे मुख्य अतिथि के रूप में थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता माइर्स एमआईई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक अध्यक्ष और ट्रस्टी प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने की.
साथ ही माइर्स एमआईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की सह प्रबंध ट्रस्टी और कार्यकारी निदेशक डॉा. सुचित्रा कराड नागरे, ट्रस्टी और कार्यकारी निदेशक डॉ. वीरेंद्र घैसास,श्री सरस्वती कराड अस्पताल के सीओओ डॉ. तुषार खाचने, प्रो.डॉ. सचिन नाइक, प्रो.डॉ. संदेश गावडे और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
इस सम्मेलन का आयोजन थायरॉइड सर्जरी के क्षेत्र में प्रख्यात राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के विचारों को साझा करने, अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन करने और नैदानिक अभ्यास को बढाने के मुख्य उद्देश्य से किया गया था. इस सम्मेलन में ट्रांसओरल एंडोस्कोपिक थायरॉइडेक्टॉमी, वेस्टिबुलर अप्रोच, ट्रांसएक्सिलरी थायरॉइडेक्टॉमी, ओपन थायरॉइडेक्टॉमी और रोबोटिक सर्जरी जैसी विभिन्न आधुनिक सर्जरी का प्रदर्शन किया गया. यहां लाइव सर्जिकल प्रदर्शन, पैनल चर्चाएँ और वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें थायराइड कैंसर और एंडोक्राइन सर्जरी में नवाचार शामिल थे.
डॉ.सी. पलानीवेलु ने कहा, एक बेहद गरीब पृष्ठभूमि से शिक्षा हासिल करने के बाद मैने गाँव के लोगों द्वारा दिए गए पैसों से कोयंबटूर के एक मेडिकल कॉलेज से अपनी शिक्षापूरी की. उसके बाद मैने गैस्ट्रोलॉजी में अपनी उन्नत ज्ञान को अद्यतन करने के लिए अपनी शिक्षा जारी रखी. इसलिए आनेवाले समय में, हमें चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों को अपनाना चाहिए और अपने ज्ञान को आत्मसात करना चाहिए.
डॉ. अंगकुन अनुवोंग ने कहा, भारतीय संस्कृति और थाई संस्कृति बहुत मिलती जुलती हैं. आज यहाँ आयोजित सम्मेलन में थायराइड के क्षेत्र में नवीनतम और सबसे उन्नत ज्ञान प्रस्तुत किया गया. जो भविष्य में उभरते सर्जनों के लिए निश्चित रुप से उपयोगी होगा.
डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, शरीर, मस्तिष्क, आत्मा, भावना और मन सभी व्यक्तियों से जुडे हुए हैं. यहीं उन्हें सर्वांगीण विकास प्रदान करता है. कोरोना काल में पूरी दुनिया ठहर सी गई थी, उस समय डॉक्टरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी. अब सभी को चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे आमूल चूल परिवर्तनों को स्वीकार करना चाहिए और रुग्णों की निरंतर सेवा करते रहना चाहिए.
डॉ. सुचित्रा कराड-नागरे ने कहा, श्री सरस्वती कराड अस्पताल के माध्यम से इस तरह के सम्मेलन का आयोजन अत्यंत सम्मान की बात है. यह सम्मेलन थायराइड के क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों को नई जानकारी प्रदान करने का एक प्रयास था. उन्होंने बढती वैश्विक स्वास्थ्य चिंताओं के साथ साथ थायराइड विकारों के प्रबंधन के लिए शीघ्र निदान, सुरक्षित सर्जरी और रोगी केंद्रिंत दृष्टिकोण के महत्व पर भी प्रकाश डाला.
सम्मेलन में थायराड अनुसंधान और सर्जरी में भारत के बढते योगदान पर प्रकाश डाला गया और अकादमिक सहयोग और शल्य चिकित्सा उत्कृष्टता के केंद्रच के रुप में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया. इस सम्मेलन में पूरे भारत से २०० से अधिक डॉक्टरो ने भचक्ष लिया.
स्पेन के डॉ. पाब्लो मोरेनों लोरेंटे ने सम्मेलन को शुभेच्छा दी. श्री सरस्वती कराड अस्पताल के सीओओ डॉ. तुषार खाचणे ने सभी अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओजस वाधवा ने किया और डॉ.नरेंद्र लोहकरे ने आभार माना.


