दोस्तों के साथ घूमने में निकल गया एक साल, जब समझ आया तब तक हो चुकी थी बहुत देर
गांव के हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़कर आठवीं पास किसान का बेटा बना डॉक्टर
भिलाई(mediasaheb.com) बलौदाबाजार जिले के छोटे से गांव अमोदी के आठवीं पास किसान के बेटे दीनानाथ नेताम ने नीट क्वालिफाई किया है। कड़ी मेहनत से कोरोनाकाल में एमबीबीएस की सीट हासिल करके राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले होनहार छात्र को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है। गांव के सरकारी स्कूल में पढ़कर अपने सपने को सच करने वाले दीनानाथ ने बताया कि नीट के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए बोर्ड एग्जाम के बाद नीट नहीं दे पाए। जब पता चला तो एक साल का ड्रॉप लेकर कोचिंग के लिए भिलाई आ गए। यहां के शहरी माहौल में कब खो गया पता ही नहीं चला। पढऩे की बजाय एक साल दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और मौज मस्ती में निकल गया। जब समय की कीमत समझ आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी और हाथ में नीट में फेल होने का रिजल्ट था। अपनी गलती से सबक लेकर दूसरे साल पूरे मन से पढ़ाई की। सेकंड अटेम्ट में आखिरकर नीट क्वालिफाई कर ही लिया।
शुरूआत में अंग्रेजी नहीं पड़ती थी पल्ले
सीजी बोर्ड स्टूडेंट होने के कारण शुरूआत में अंग्रेजी में बहुत दिक्कत हुई। दीनानाथ ने बताया कि जब वे पहले साल कोचिंग में पढऩे पहुंचे तो कुछ भी पल्ले नहीं पड़ता था। बेसिक से लेकर तैयारी और नॉलेज सब कुछ जीरो था। ऐसे में आधा साल तो नीट एग्जाम क्या होता है यही समझने में निकल गया। दोस्तों को ज्यादा वक्त देने के चक्कर में रूटीन पढ़ाई भी नहीं कर पाता था। इन्हीं गलतियों की वजह से सफलता के लिए दो साल तक इंतजार करना पड़ा। एक दिन पिता ने समझाया कि अगर अभी पढ़ाई में ध्यान नहीं दिया तो शायद जीवन में कभी सफलता नहीं मिलेगी। उनकी बात दिल को लग गई। फिर क्या कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। पहले साल फेल होने के बाद मन में निराश आ गई थी। बार-बार खुद को दोष देकर खुद में शर्मिंदगी होने लगी थी कैसे मैंने अपना टाइम वेस्ट किया। इन सबके बीच कहीं न कहीं एक उम्मीद भी थी कि अगर दूसरा प्रयास करूंगा तो जरूर सफल होंउगा। ये बात सच भी साबित हुई।
हर बच्चे पर बराबर ध्यान देते हैं सचदेवा के टीचर्स
सचदेवा कोचिंग के बारे में गर्वमेंट टीचर चाचा ने बताया था। उनके कहने पर मैंने कोचिंग के लिए सचदेवा को चुना। यहां के टीचर्स हर बच्चे पर बराबर ध्यान देते हैं। शुरू-शुरू में डाउट पूछने में बहुत झिझक होती थी पर धीरे-धीरे टीचर्स के मोटिवेशन से वो झिझक भी दूर हो गई। हिंदी मीडियम स्टूडेंट्स की अंग्रेजी पर भी यहां टीचर्स ने काफी मेहनत की। यही कारण है कि अब अंग्र्रेजी का फीयर भी मन से निकल गया है। गेस्ट सेशन में सचदेवा के एक्स स्टूडेंट मशहूर हार्ट सर्जन डॉक्टर कृष्णकांत साहू को सुनकर बहुत ज्यादा प्रेरणा मिली। गांव से निकलकर देशभर में नाम कमाने वाले डॉक्टर साहू ने कहा था कि सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है। अब लगता है कि पहली बार ठोकर नहीं लगी होती तो शायद दूसरी बार सफलता को इंज्वाय नहीं कर पाता।
पढ़ाई के साथ जैन सर की काउंसलिंग से मिली सफलता
दीनानाथ ने बताया कि सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर अक्सर बच्चों की काउंसलिंग करते हैं। एक दिन उन्होंने क्लास में आकर सबकी दिनचर्या पूछी। कुछ बच्चों ने कहा कि हम देर रात तक पढ़ते हैं तब जैन सर ने उन्हें टोकते हुए बताया कि रात सोने के लिए है। तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने के लिए सोना भी बहुत जरूरी है। पढ़ाई के साथ-साथ अपनी सेहत का भी बराबर ध्यान देना है। एक पैरेंट्स की तरह वो घर से दूर रहकर पीजी में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स का ध्यान रखते थे। जब हम निराश होते थे अपनी शानदार काउंसङ्क्षलग से हमें दोगुना उत्साह से भर देते थे। ये बातें भी सफलता के लिए काफी हद तक मददगार बनी। नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से यही कहूंगा कि पढऩे के साथ सेहत का भी ख्याल रखें। एग्जाम हॉल में प्रेशर को कंट्रोल करना सीखे। दोस्तों को उतना ही वक्त दे जितना जरूरी हो और केवल पढ़ाई पर फोकस करें। सक्सेस जरूर मिलेगा। (the states. news)

