- तीन साल ड्रॉप इयर में खुद की काबिलियत पर होने लगा था शक, सोचता था क्या मैं डॉक्टर बन पाऊंगा
- गलितयों को सुधारकर नॉलेज को किया यूट्रिलाइज, सीजी पीएमटी किया क्वालिफाई
भिलाई (media saheb.com)| तीन साल ड्रॉप इयर में खुद की काबलियत पर कई बार शक होता था। मन में सोचता था कि मैं जीवन में कभी डॉक्टर बन भी पाऊंगा या नहीं। दूसरे ही पल जेहन में मां-पापा का चेहरा नजर आता था। कितनी उम्मीदों से उन्होंने मुझे पढऩे के लिए घर से दूर भेजा है। बस यही बातें सोचकर कभी खुद को हारने नहीं दिया। तीन ड्रॉप के बाद फाइनली सीजी पीएमटी क्वालिफाई कर लिया। ये कहानी है रायगढ़ जिले के खरसिया के रहने वाले डॉ. हिमांशु दुबे की। जो एम्स में काम करते हुए फिलहाल पीजी की तैयारी कर रहे हैं। डॉ. हिमांशु कहते हैं सीजी बोर्ड स्टूडेंट को सच में सीबीएसई बोर्ड से पढऩे वालों स्टूडेंट्स से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अगर आप जरनल कैटेगरी हैं तो दिमाग में पहले ही ये बात फिट कर लीजिए कि दुनिया के लिए भले ही हजार सीट है लेकिन आपके लिए सिर्फ दस सीट है। उसी दस सीट के लिए जी-जान लगाना है। इसलिए अपने दिल, दिमाग को दोगुनी नहीं चारगुनी मेहनत के लिए शुरू से तैयार रखा। ड्रॉप इयर में हर साल रैंक सुधर रही थी इसलिए खुद पर धीरे-धीरे भरोसा भी होने लगा था।
पापा चाहते थे मैं डॉक्टर बनूं
डॉ. हिमांशु ने बताया कि उनके घर में कोई डॉक्टर नहीं था, इसलिए उनके पिता शुरूआत से ही चाहते थे कि बेटा बड़ा होकर डॉक्टर बने। जब मैंने मेडिकल एंट्रेस की तैयारी शुरू की तो सबसे ज्यादा पापा ने ही मोटिवेट किया। वो हमेशा कहते थे कि तुम पैसों की चिंता मत करो बस पढ़ाई करो। किसी को जल्दी तो किसी को देर से सफलता मिलती है, मेहनत कभी जाया नहीं जाता। उनकी बातें सुनकर मन उत्साहित हो जाता था। जब कोचिंग चयन की बारी आई तो सबने मिलकर सचदेवा को चुना। सचदेवा के बारे में जैसा सुना तो उससे ज्यादा अच्छा पढऩे का माहौल यहां मिला। लगातार तीन साल सचदेवा से ही पढ़ाई की। फिजिक्स, कैमेस्ट्री और बायो का असली बेस सचदेवा में आकर ही तैयार हुआ। कैमेस्ट्री और बाटनी थोड़ा वीक लगता था इसलिए इन दोनों विषयों की तैयारी के लिए ज्यादा समय दिया।
जैन सर ने डिपे्रशन के दौर में किया मोटिवेट
सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की मोटिवेशनल क्लास से डिप्रेशन छू मंतर हो जाता था। डॉ. हिमांशु ने बताया कि जैन सर की काउंसलिंग से नेगेटिविटी अपने आप ही दूर हो जाती थी। वो हमेशा क्लासरूम में कहते थे कि जब भी आपका गिवअप करने का मन करे तो समझना आप लक्ष्य के बिल्कुल नजदीक हो। ऐसे समय में पढ़ाई छोडऩे की बजाय हिम्मत जुटाकर बस थोड़ा और पढऩा है और आपका सलेक्शन निश्चित है। सचदेवा के टीचर्स के सलेक्टिव स्टडी मटेरियल और शॉर्ट नोट्स भी पढऩे में काफी हेल्पफुल रहा। क्या पढऩा है, कैसे पढऩा है, किसे छोडऩा है, टाइम मैनेज कैसे करना है ये सारी चीजें सचदेवा के टीचर्स ने बखूबी बताया और सिखाया। छोटी-छोटी ही सही लेकिन ये बातें सलेक्शन में काफी अहम साबित हुई। ड्रॉप इयर में स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से कुछ नंबरों से सलेक्शन से चूक गया था। तब सचदेवा के टीचर्स ही थे जिन्होंने कहा कि एक अटेम्ट और करो तुम्हारा सलेक्शन जरूरी होगा।
प्रैक्टिस मेक परफेक्ट
नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से यही कहना चाहूंगा कि प्रैक्टिस मेक परफेक्ट। सिर्फ पढऩा नहीं है पढऩे के साथ अपने ज्ञान को पुराने प्रश्न पत्र साल्व करके परखना भी है। जब पढ़े हुए चीजों को बार-बार दोहराते हैं या उनकी प्रैक्टिस करते हैं तो भूलने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। दूसरे की बजाय अपना नोट्स बनाकर पढऩे की आदत बनाएं। इससे एग्जाम के शॉर्ट टाइम में रिविजन करने में बहुत मदद मिलती है। सेहत का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी है। अगर सेहत अच्छी नहीं रहेगी तो एग्जाम में आप अच्छा परफार्मेंस नहीं कर पाएंगे।For English News : the states.news

