टेस्ट सीरिज में कम नंबर आने पर गाना गाकर दूर करती थी निशिता खुद का डिप्रेशन
भिलाई(media saheb.com). हमारे देश में बेटी पैदा होते ही लोग उसकी शादी और दहेज के लिए एक-एक पैसा जोडऩा शुरू कर देते हैं पर अनिता की आंखों में अपनी बेटी निशिता के लिए कुछ और सपने थे। मां ने बेटी के बचपन में ही तय कर लिया था कि बड़ी होकर वो डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करेगी। इसलिए बेटी को पढ़ाने के लिए घर खर्च से रुपए बचाकर एक-एक पैसा जोडऩा शुरू किया। ताकि नीट की तैयारी के लिए बेटी को पैसों की दिक्कत न हो। मां के सपने को अपना जीवन का लक्ष्य बनाने वाली बालोद के झलमला में रहने वाली निशिता ने भी कड़ी मेहनत की। अपने दूसरे प्रयास में नीट क्वालिफाई करके जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया है। अब मां बड़े फक्र से लोगों से कहती हैं कि मेरी बेटी बिटिया डॉक्टर हो गई है। निशिता कहती है कि मां ने बचपन से ही मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया। जब चर्च में हम प्रेयर करने जाते थे तो वो मुझे अकेले मंच पर गीत गाने के लिए भेज दिया करती थी। ताकि मैं हर जगह अपना कॉन्फिडेंस बनाकर रखूं। उनकी छोटी-छोटी सीख की वजह से ही मैं नीट जैसी कठिन परीक्षा क्वालिफाई कर पाई।
फिजिक्स, कैमेस्ट्री दोनों था कमजोर
निशिता ने बताया कि बायो लेकर 12 वीं बोर्ड में उसने 83 प्रतिशत अंक अर्जित किया था। बावजूद जब नीट की तैयारी शुरू की तो लगा फिजिक्स और कैमेस्ट्री बहुत ज्यादा कमजोर है। पहले प्रयास में असफलता का कारण भी बेसिक क्लीयर न होना बना। जीवन में पहली बार फेल होकर काफी निराश हो गई थी। ऐसे में मां ने कहा कि फिर से तैयारी करो। टेस्ट सीरिज में भी जब कम नंबर आते थे मैं रोने लगती थी। धीरे-धीरे स्टडी ऑवर बढ़ाकर पूरे सिलेबस को कवर किया। फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जब भी डिप्रेशन में जाती थी तो गाना गाकर खुद को बाहर निकालती थी।
सचदेवा में आकर हुआ बेसिक क्लीयर
निशिता ने बताया कि उसने 11 वीं क्लास में ही सचदेवा का क्रैश कोर्स किया था। ताकि नीट के बारे में ज्यादा जान सके। 12 वीं बोर्ड के बाद सीधे सचदेवा में एडमिशन लिया। शुरूआत में बेसिक क्लीयर नहीं होने की वजह से बहुत दिक्कत हुई। सचदेवा के टीचर्स ने बेसिक से हर सब्जेक्ट को पढ़ाकर हमारी तैयारी की नींव मजबूत बना दी। सचदेवा के टेस्ट सीरिज में अपनी पढ़ाई को परखने का मौका मिला। टीचर्स एक विषय की इतनी बार रिवीजन करवा देते थे कि वो जल्दी याद हो जाता था। स्टूडेंट्स के बीच कॉम्पीटिशन इतना होता था कि हम न चाहते हुए भी पढऩे के लिए मजबूर हो जाते थे। बीच-बीच में सचेदवा से पढ़कर निकले देश के जाने माने डॉक्टरों का वीडियो हमें दिखाया जाता था। उनकी सफलता की कहानियां एक सकारात्मक ऊर्जा देती थी।
काउंसलिंग वीडियो देखकर मिला मोटिवेशन
सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर के पैरेंटिंग और काउंसलिंग के वीडियो देखकर काफी मोटिवेशन मिलता था। एक वीडियो में उन्होंने मशहूर बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर जी के फेल होने और उनके फैमिली के द्वारा इस फेल्यिर को सेलिब्रेट करने की कहानी बताईउस घटना को जानकर लगा जब अनुपम खेर फेल होकर भी इतने महान कलाकार बन सकते हैं तो मैं दूसरी बार मेहनत करके डॉक्टर क्यों नहीं बन सकती। ये बात दिमाग में बैठ गई थी कि एमबीबीएस की सीट हासिल करके ही घर जाना है।(the states. news)

