कोरोनाकाल में नीट क्वालिफाई करके लामाडीह गांव की पहली डॉक्टर बनकर रचा इतिहास
भिलाई. (mediasaheb.com) बायो को दुनिया का सबसे इंटरेस्टिंग सब्जेक्ट मानने वाली महासमुंद जिले के लामाडीह गांव की धनेश्वरी बरिहा ने नीट क्वालिफाई किया है। कोरोनाकाल में गांव की पहली डॉक्टर बनकर इतिहास भी रच दिया है। अपने दूसरे अटेम्ट में सफलता के परचम लहराने वाली धनेश्वरी उस गांव से वास्ता रखती है जहां आज भी आठवीं के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए कई किमी. दूर दूसरे गांवों के स्कूलों का सफर करना पड़ता है। अपनी सफलता का श्रेय आरआई पिता को देने वाली धनेश्वरी कहती है कि मन में ठान लिया जाए तो जीतने से कोई नहीं रोक सकता। मैंने पढ़ाई के साथ-साथ घर के काम में मां का हाथ बंटाकर लॉकडाउन में खुद को स्ट्रेस से दूर रखा। जिसके कारण ही नीट जैसी कठिन परीक्षा धैर्य के साथ देकर क्वालिफाई कर पाई।
नीट के बारे में ज्यादा नहीं थी जानकारी
धनेश्वरी ने बताया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि होने के कारण नीट परीक्षा की ज्यादा जानकारी नहीं थी। 12 वीं बोर्ड के साथ ही जब पहली बार नीट एग्जाम दिया तो लगा कि बेहतर तैयारी से उतरकर इस परीक्षा को मैं पास कर सकती हूं। इसके बाद मैंने पिता के सामने कोचिंग का प्रस्ताव रख दिया। घर की बड़ी बेटी होने के कारण पापा ने भी कहा कि एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी करो। अपनी सहेलियों और स्कूल के सीनियर से सलाह लेकर कोचिंग करने भिलाई आ गई। शुरूआत में कोचिंग में बहुत दिक्कत होती थी। नंबर कम आते तो मन उदास हो जाता था। समय के साथ मैंने रफ्तार पकड़ी फिर पीछे कभी मुड़कर नहीं देखा। अब जब लोग मुझे कहते हैं हमसे इलाज करने का कितना फीस लोगी तो उनकी बातें सुनकर मन को तसल्ली होती है।
सचदेवा में आकर सीखा नोट्स बनाकर पढऩा
धनेश्वरी ने बताया कि उसकी सहेलियों ने कोचिंग के लिए सचदेवा को चुना था इसलिए वो भी तैयारी के लिए भिलाई आ गई। सचदेवा कॉलेज के टीचर्स एक ही टॉपिक को कई तरह से पढ़ाकर उसे बार-बार रिवीजन करवा देते थे। इससे चीजों को भूलने की आदत दूर हो गई। टीचर्स हर दिन मोटिवेट करते थे। पढ़ाई के साथ-साथ उनकी मोटिवेशनल बातें आगे बढऩे की प्रेरणा देती थी। टीचर्स की बात मानकर मैंने नोट्स बनाना शुरू किया। लॉकडाउन के वक्त ये नोट्स सबसे ज्यादा काम आए। गेस्ट सेशन में सचदेवा के एक्स स्टूडेंट और देश के मशहूर हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू की बातें सुनकर मन में जो थोड़ी बहुत निराश थी वो भी दूर हो गई। एक संघर्ष के बाद मुकाम को हासिल करने का सुकून कैसा होता है ये उनके चेहरे पर साफ झलकते हुए देखने का शानदार मौका मिला। जो जिंदगी भर याद रहेगा।
जैन सर ने दी थी नकारात्मक सोच को दूर रखने की सलाह
सचदेवा कॉलेज भिलाई के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर हमारी अक्सर काउंसलिंग करते थे। एक दिन उन्होंने टेस्ट सीरिज के बाद क्लास में आकर कहा था कि नकारात्मक सोच को हमेशा खुद से दूर रखो चाहे वो पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल। उनकी बात को जब अमल में लाया तो तैयारी के दौरान कभी डिप्रेशन नहीं हुआ। जैन सर की छोटी-छोटी प्रेरणादायी कहानियां सुनकर खुद की सफलता पर पूरा यकीन हो गया था। इस साल जो बच्चे नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे यही कहूंगी कि अपनी मेहनत पर भरोसा करना सीखें। अगर आपने सौ फीसदी दिया है तो सलेक्शन होने से कोई नहीं रोक सकता। (the states. news)

