- फिजिक्स को स्ट्रांग करने बायो-मैथ्स लेकर दिया बोर्ड एग्जाम
- पहले अटेम्प्ट में नहीं हुआ सलेक्शन तो दुनियाभर की बातें बनाते थे रिश्तेदार, छोड़ दिया था परिवार में आना जाना
भिलाई(mediasaheb.com)| बचपन में डॉक्टर सेट के खिलौने से खेलकर घर के सभी लोगों का बुखार चेक करने वाली मासूम प्रियंका आज सच में अपनी कड़ी मेहनत से डॉक्टर बन गई है। भिलाई की रहने वाली डॉ. प्रियंका टोप्पो ने 12 वीं बोर्ड के बाद एक साल ड्रॉप लेकर मेडिकल एंट्रेस की तैयारी की। साल 2012 में सीजी पीएमटी क्वालिफाई किया। रायपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस के बाद फिलहाल जशपुर जिला हॉस्पिटल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में मरीजों का इलाज कर रही है। डॉ. प्रियंका कहती है कि असफलता और संघर्ष के दिनों में खुद को संभलाना और मोटिवेट करना बहुत मुश्किल होता है। खासतौर पर जब आप एक लड़की हो और सारी दुनिया को आपके फ्यूचर की पड़ी हो। रिश्तेदार ड्रॉप इयर में तरह-तरह की बातें बनाते थे। अपने साथ पढऩे वाले सहेलियों को अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता देख बहुत बुरा भी लगता था, लेकिन मैंने ठान लिया था। बनूंगी तो सिर्फ डॉक्टर ही। इसलिए एक साल तक न किसी फैमिली फंक्शन में गई और न ही पढ़ाई के अलावा कुछ सोचा। कोचिंग से घर और घर में खुद को एक कमरे में बंदकर घंटों किताबों में खोई रहती थी। जिसका परिणाम भी एमबीबीएस सीट के रूप में सुखद मिला।
फिजिक्स को स्ट्रांग बनाने लिया था बायो-मैथ्स
डॉ. प्रियंका ने बताया कि अक्सर बायो स्टूडेंट का फिजिक्स और कैमेस्ट्री वीक होता है। इसे ध्यान रखते हुए मैंने 11 वीं में बायो-मैथ्स सब्जेक्ट लिया। दोनों मेन विषयों को एक साथ पढऩा और बोर्ड एग्जाम अच्छे नंबर से क्लीयर करने में काफी मुश्किल हुई पर जब मेडिकल एंट्रेस की तैयारी शुरू की तो इसका लाभ भी मिला। कोचिंग में आने वाले बहुत सारे बच्चों को बेसिक से शुरूआत करनी पड़ती है पर मेरे साथ ऐसा नहीं था। मैंने 11 वीं से ही मेडिकल एंट्रेस की किताबें और प्रश्न पत्र साल्व करना स्टार्ट कर दिया था। ड्रॉप इयर में पैरेंट्स और टीचर्स ने काफी सपोर्ट किया जिसके कारण निराशा कभी हावी नहीं हो पाई।
सचदेवा के नोट्स से हुआ एग्जाम प्रेशर कम
मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए सचदेवा कॉलेज भिलाई को चुनने वाली डॉ. प्रियंका ने बताया कि उनका काफी हद तक एग्जाम प्रेशर सचदेवा के नोट्स को पढ़कर कम हो गया था। यहां के टीचर्स काफी सिंपल और शॉर्ट तरीके में विषयों की डीपली पढ़ाई करवाकर मन में कोई डाउट रहने ही नहीं देते। सचदेवा के टेस्ट सीरिज से अपनी तैयारी को परखने का मौका मिलता। मैं हर टेस्ट को काफी गंभीरता से लेती थी क्योंकि हर संडे टेस्ट सीरिज में अच्छे रैंक लाने वालों को स्टेज में चढ़कर इनाम लेने का मौका मिलता था। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग क्लास में सबकुछ भूलकर सिर्फ जैन सर को सुनती थी। उनकी बातें एक ऐसी पॉजिटिव एनर्जी देती जिसे सुनकर कभी कॉन्फिडेंस कम नहीं होता। मन में लिया हुआ डॉक्टर बनने का संकल्प और भी दृढ़ होता चला गया।
टाइम मैनेजमेंट जरूरी
नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगी कि एग्जाम में टाइम मैनेजमेंट करना बहुत जरूरी है। कई बार आपकी तैयारी पूरी रहती है लेकिन एग्जाम प्रेशर की वजह से आप हॅाल में टाइम मैनेजमेंट नहीं कर पाते। आते हुए भी कई सवाल छोड़कर अपना रिजल्ट खराब कर लेते हैं। इसलिए एग्जाम से पहले घर में बैठकर पुराने पेपर को ठीक तीन घंटे में उसी अंदाज में साल्व करें जैसा एग्जाम हॉल में करते हैं। इससे गलती भी पकड़ आ जाएगी और खुद में मलाल भी नहीं रहेगा। लोगों की बातों को इग्नोर करना सीखें। हमेशा खुद के पॉजिटिव सोच के साथ मोटिवेट करें।(the states. news)

