लगातार चार साल ड्रॉप लेकर भी नहीं मानी हार, प्रदेश में 37 वां रैंक लाकर किया सीजी पीएमटी क्वालिफाई
भिलाई (media saheb.com)| आजकल स्टूडेंट असफलता का नाम सुनकर ही निराश हो जाते हैं, लेकिन आज हम एक ऐसे डॉक्टर की बात कर रहे हैं जिन्होंने एक दो नहीं लगातार चार साल ड्रॉप लिया। हार मानने की बजाय हर साल अपने रैंक में इंपू्रवमेंट करते चले गए। अंतत: चौथे प्रयास में प्रदेश में 37 वां रैंक लाकर सीजी पीएमटी क्वालिफाई किया। ये रियल स्टोरी है बेमेतरा जिले के ग्राम पहंदा निवासी डॉ. पूर्णेन्द्र कुमार साहू की। जिन्होंने हर हाल में बस अपने डॉक्टर बनने के सपने को जीया। जब दोस्त कहते थे कि यार अब मैं एग्जाम नहीं दूंगा तो डॉ. पूर्णेन्द्र कहते थे कि मैं जब तक मेडिकल कॉलेज की सीट हासिल नहीं कर लूंगा तब तक परीक्षा दूंगा। राजनांदगांव जिले में शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत डॉ. साहू कहते हैं कि हारने के बाद जीतने का मजा ही कुछ और है। अगर आपकी असफलता में परिवार साथ खड़ा रहता है तो सफल होने की संभावना सौ गुना बढ़ जाती है। हर साल जब ड्रॉप इयर में मैं असफल होता तो पिता जी बस यही कहते कि बेटा धन की चिंता मत करो, बस मन लगाकर पढ़ाई करो। बाकी तुम्हारे पापा मैनेज करे लेंगे। ये वो शब्द थे जिसने मेरी सफलता की कहानी लिखी।
गांव के स्कूल से की 12 वीं बोर्ड तक पढ़ाई
डॉ. पूर्णेन्द्र ने बताया कि उनकी 12 वीं बोर्ड तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई है। उस वक्त स्कूल में बायो विषय पढ़ाने वाली केवल एक टीचर हुआ करती थी। तब मेडिकल एंट्रेस के एक एग्जाम सीजी पीएमटी के बारे में ही पता था। जब बोर्ड एग्जाम देकर पीएमटी की तैयारी के लिए भिलाई में कोचिंग ज्वाइन किया तब पता चला कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए और कई एग्जाम भी होते हैं। सीजी बोर्ड से पढऩे के कारण विषयों की गहराई से जानकारी भी कम थी। ऐसे में एक साल तो बेसिक को स्ट्रांग करने में निकल गया।
सचदेवा के टीचर्स के कारण हर साल इंपू्रव हो रही थी रैंक
मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए जब पहली बार मैं सचदेवा कॉलेज भिलाई पहुंचा तो यहां के बड़े-बड़े नामी स्कूल के टॉपर बच्चे क्लासमेंट बने। बेसिक कमजोर होने के कारण टीचर्स जो पढ़ाते वो शुरूआत में ऊपर से निकल जाता। धीरे-धीरे सचदेवा के टीचर्स ने हमारी वीकनेस को स्ट्रांग प्वाइंट में बदल दिया। फिजिक्स, कैमेस्ट्री, बायो के साथ ही अंग्रे्रजी भी अलग से कक्षाएं लेकर सिलेबस पढ़ाया। जब भी कभी निराश होते तो सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर अपनी मोटिवेशनल बातों से हमें डबल एनर्जी से भर देते थे। जैन सर ने न सिर्फ मुझे मोटिवेट किया बल्कि पर्सनली कई बार काउंसङ्क्षलग भी की ताकि बेहतर तरीके से मैं एग्जाम के लिए तैयारी कर सकूं। पहले अटेम्ट में जब फेल्यिर मिला तो वील पावर कहीं न कहीं डगमगा गया था, उस वक्त जैन सर ने सही मार्गदर्शन दिया। इसे सचदेवा का अच्छा माहौल ही कहूंगा कि मैंने चारों ड्रॉप में सचदेवा में ही पढ़ाई की। क्योंकि मेरा ये मानना है कि जो पढ़ाई क्लासरूम में हो सकती है वो सेल्फ स्टडी में नहीं। इसलिए मैंने चारों साल अपनी पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए कोचिंग किया।
पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखें
जो बच्चे इस साल नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे यही कहना चाहूंगा कि अपनी पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना बहुत जरूरी है। कई बार ड्रॉप इयर में हम पढ़ाई के साथ बाकी चीजों में खो जाते हैं ऐसे में लक्ष्य मिलना बहुत मुश्किल है। जब निराश हो जाएं तो खुद को मोटिवेट करिए। ड्रॉप इयर की चिंता किए बने बस पढ़ते रहे। एग्जाम से पहले पुराने पेपर्स को साल्व करें। इससे काफी हद तक कान्फिडेंस बढ़ता है। जो सफल हुए हैं उनकी सक्सेस स्टोरी जरूर पढ़े।(the states. news)

