डिप्रेशन को न कहकर हमेशा रहा पॉजिटिव, सलेक्टिस स्टडी मटेरियल पर किया फोकस
भिलाई(media saheb.com) डिस्कवरी चैनल देखना और साइंस से जुड़ी हर छोटी से छोटी चीज जानना मेरी बचपन से हॉबी थी। परिवार में भी कोई डॉक्टरी प्रोफेशन से जुड़ा नहीं था। इसलिए 11 वीं क्लास पहुंचते ही मैंने डॉक्टर बनने का डिसीजन लिया। बायो लेकर मेडिकल एंट्रेस की तैयारी शुरू कर दी। 12 बोर्ड के बाद पहला अटेम्ट दिया लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ। फिर एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी की एक साथ साल 2012 में कर्नाटका और सीजी पीएमटी क्वालिफाई कर लिया। ये जर्नी है दुर्ग के डॉ. मयंक चौहान की जो कर्नाटका से एबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद फिलहाल पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं। डॉ. मंयक कहते हैं कि सबकुछ पढऩे की कोशिश करने की बजाय जो सिलेबस में है उसे पढऩा चाहिए। मेडिकल एंट्रेस एक समुद्र की तरह है यहां अगर सबकुछ कवर करने की कोशिश करेंगे तो समुद्र में समा जाएंगे। इसलिए सलेक्टिव स्टडी मटेरियल और बेसिक को स्ट्रांग करने में खुद को ज्यादा समय दें। एक बार यदि बेसिक समझ आ गया तो आप किसी भी सवाल का जवाब अपने बुद्धि और तर्क से भी दे सकते हैं।
जीव-जंतुओं के बारे में जानना लगता था बहुत अच्छा
डॉ. मयंक ने बताया कि उन्हें बचपन से साइंस काफी अट्रेक्ट करता था। जीव-जंतुओं के बारे में जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहता था। बायो में इंटरेस्ट और कुछ अलग करने की चाहत ही मुझे एमबीबीएस की ओर खींच लाई। मेरे फ्रेंड सर्कल में जितने लोग थे वे भी आज डॉक्टर ही हैं। कई लोगों का ये मानना है एवरेज स्टूडेंट बड़े काम्पिटेटिव एग्जाम क्लियर नहीं कर सकते। मैं खुद को इसका अपवाद मानता हूं क्योंकि मैं बचपन से ही एवरेज स्टडूेंट था, आज भी हंू और एवरेज स्टूडेंट बनकर ही पहले पीएमटी और बाद में पीजी की सीट हासिल की। इसलिए एवरेज स्टूडेंट की अपनी सोच बदलकर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करना चाहिए। लंबी दौड़ के लिए जाने-जाने वाला कछुआ भी धीरे-धीरे कदम बढ़ाकर मंजिल तक पहुंच जाता है फिर तो हम इंसान हैं।
गलत स्टडी पैटर्न को सुधारा सचदेवा के टीचर्स ने
सचदेवा के बारे में काफी सुना था। मीडिया में भी सचदेवा से सलेक्ट हुए बच्चों के इंटरव्यू देखता था। इसलिए मैंने कोचिंग के लिए भिलाई के सचदेवा कॉलेज को चुना। डॉ. मयंक ने बताया कि सचदेवा के टीचर्स ने उनके गलत स्टडी पैटर्न को सुधारने में बड़ी भूमिका अदा की है। जब पहली बार कोचिंग पहुंचा तब मैं सबकुछ एक साथ पढऩे की कोशिश करता था। उस वक्त टीचर्स ने बताया कि क्या पढऩा है, किसे छोड़ा जा सकता है और किस टॉपिक को बिल्कुल पढऩे की जरूरत नहीं है। कॉम्पिटेटिव एग्जाम में समय, सीट कम और कॉम्पिटिशन ज्यादा रहता है। ऐसे में एक्सपर्ट टीचर्स का गाइडलाइन मिल जाए तो कॉम्पिटिशन में टिके रहने की हिम्मत मिलती है। ज्यादातर स्टूडेंट क्या पढ़ें और क्या न पढ़ें इसी उधेड़बुन में समय बर्बाद कर देते हैं। पढ़ाई के साथ सही मार्गदर्शन भी जरूरी है जो सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर से मिला। ड्रॉप इयर में मैं डिप्रेस हो गया था तब जैन सर ने काउंसलिंग करते हुए पॉजिटिव रहने की सलाह दी। उनकी एक काउंसलिंग से एनर्जी दोगुनी हो गई थी। हमेशा नेगेटिव विचारों से बचने की सलाह दी जो आगे चलकर भी काफी काम आया है।
टारगेट सेट करके पढ़ाई करें
जो स्टूडेंट नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे कहना चाहूंगा कि आप हमेशा टारगेट सेट करके पढ़ाई करें। रिविजन के लिए भरपूर टाइम निकाले। बिना रिविजन के आपका पढ़ा हुआ हर चीज बेकार हो जाएगा। इसलिए रिविजन करना बहुत जरूरी है। पैटर्न को समझने के लिए बार-बार प्रेक्टिश करें। साथ ही पुराने प्रश्न पत्र भी साल्व करें।

