19 गांवों के लोग हो सकते हैं विस्थापित
रायपुर, (mediasaheb.com) । छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 19 गांवों के लोगों को विस्थापित किए जाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में वन विभाग ने शासन को पत्र लिखा है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया द्वारा की गई बाघों की गणना के अनुसार छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या 46 से घटकर 19 हो गई है।
वर्ष 2006 और 2010 में प्रदेश में 26 बाघ मिले थे जबकि 2014 की जनगणना के अनुसार यह संख्या 46 हो गई थी। इसकी पुष्टि वन विभाग ने की थी लेकिन वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ( Wildlife Institute of India)ने जब वर्ष 2018 में बाघों की गणना शुरू की तो राज्य में सिर्फ 19 बाघ मिले। प्रदेश के सीता नदी क्षेत्र का 1842.54 वर्ग किलोमीटर, अचानकमार का 914.017 वर्ग किलोमीटर , इंद्रावती क्षेत्र का 2799.03 वर्ग किलोमीटर का वन परिक्षेत्र टाइगर रिजर्व सुरक्षित है। शासन द्वारा वन विभाग को हर संभव मदद भी दी गई। इसके बावजूद बाघों की संख्या में अचानक आई कमी से सभी चिंतित है।वन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश के एपीसीसीएफ पिछले दिनों दो दिवसीय दौरे पर प्रदेश आए थे। उन्होंने सलाह दी थी कि अचानकमार के 626 किलोमीटर के अंतर्गत कोर इलाके के अंतर्गत आने वाले गांव को इसके लिए सुरक्षित किया जाना चाहिए।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार इस संबंध में गांव के लोगों के विस्थापन की प्रक्रिया के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। विस्थापित लोगों को नियमानुसार सभी सुविधाएं दी जाएंगी। बताया जा रहा है कि बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश से बाघों को लाकर जंगल में बाघों की ब्रीडिंग भी कराई जाएगी। इसके लिए पन्ना अभ्यारण, बांधवगढ़ या कान्हा से बाघ लाया जाएगा। इस मामले में सबसे ज्यादा कठिनाई 19 गांवों के लोगों को विस्थापित करने में होगी। पहले भी इसे लेकर काफी हो हल्ला हो चुका है। जिन गांवों का विस्थापन होना है, उनमें तिलाई डबरा, बिरार पानी, अचानकमार, छीर हट्टा, सारस डॉल, छपरवां, लमनी, अतरिया, बिंदावल, रंजकी इत्यादि गांव हैं। (हि.स.)

