कोरिया (mediasaheb.com) । छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में बांस की दुर्लभ और विलुप्त प्रजाति ‘बम्बू सेटम’ को संरक्षित किया जा रहा है। विश्व के अनेक प्रकार की बांस की प्रजातियों का संरक्षण करने छत्तीसगढ़ के पूर्व वित्त मंत्री स्व. रामचंद्र सिंहदेव की सोच थी, जिन्होंने खुद अपने विदेश दौरे के दौरान वहां की बांस के पौधे यहां रोपकर बांस संरक्षण की शुरुआत की थी। अब कोरिया कुमार के नाम से इस योजना को आगे बढ़ाते हुए बैकुण्ठपुर वनमण्डल में जिला मुख्यालय स्थित गेज नर्सरी में 105 प्रजातियों के बांस का संग्रहण और संरक्षण के साथ साथ पौध तैयार करने व वनों में लगाने का कार्य इस सोच के साथ किया जा रहा है कि कई मामले में लोहे और प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बांस की उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके। वही बैकुण्ठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आनन्दपुर नर्सरी में बाल्टी बांस (जो मूलतः भूटान में पाया जाता है) के चार पौधों को विशेष देख रेख के साथ तैयार किया जा रहा है।
आनन्दपुर रोपणी केंद्र के प्रभारी रामकुमार तिवारी ने बताया कि, बाल्टी बांस जो कि भूटान की बांस प्रजाति है इसके चार पौधों को नर्सरी में तैयार किया जा रहा है। बड़ा होने पर इस बांस की मोटाई बाल्टी के बराबर तक होता है। 11 हेक्टर में बने आनन्दपुर नर्सरी में विभिन्न प्रकार के पौधे प्रत्येक वर्ष तैयार किये जाते हैं इसके अलावा नर्सरी में ही वर्मी कम्पोस्ट भी बनाया जा रहा है, जो पौधों के लिए खाद के रूप में बहुत उपयोगी है।
उल्लेखनीय है कि, विश्वभर में बांस की लगभग 380 से अधिक प्रजाति पाई जाती हैं, बांस को क्लाइमेट व ग्लोबल वार्मिग के लिये उपयोगी माना जाता है, बांस की प्रजाति घास की तरह पतली से लेकर ड्रम की तरह मोटी होती है। इनमें से 105 प्रजातियों को कोरिया वन मंडल के बैकुण्ठपुर वन परिक्षेत्र में गेज नर्सरी पर संरक्षित कर बांसों के पौधे तैयार करने वाला छत्तीसगढ़ का यह पहला बम्बू सेटम है। इस बम्बू सेटम का शुभारंभ अगस्त 2019 में हुए वन महोत्सव कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने किया था। (हि.स.) http://www.mediasaheb.com

