- कोरबा के दीपका की अराधना ने दो साल ड्रॉप लेकर तीसरे अटेम्ट में किया नीट क्वालिफाई
- बार-बार फेल्यिर से बना लिया था पढ़ाई छोडऩे का मन, पैरेंट्स ने दिया तीसरी बार कोशिश करने का हौसला
भिलाई (media saheb.com). दसवीं कक्षा में एक एक्सीडेंट में पिता की मौत हो गई। मां ने दो बच्चों को पालने के लिए प्राइवेट कंपनी में नौकरी करना शुरू कर दिया। मैं घर की बड़ी बेटी हूं, ऐसे में नाना का सपना था कि मैं डॉक्टर बनकर समाज में खुद की एक पहचान बनाऊं। उनके सपने को पूरा करने का सफर मेरे लिए कांटों से भरा रहा। दो बार नीट में असफल होकर मैं टूट सी गई थी। ये तक सोचने लग गई थी कि समाज में लोग क्या कहेंगे। बेटी को बाहर पढ़ने भेजा और पता नहीं ये क्यों परीक्षा पास नहीं कर पाई। एक वक्त ऐसा आया जब मैंने एमबीबीएस का सपना छोड़कर किसी और कोर्स में एडमिशन लेने के लिए खुद को मैंटली तैयार कर लिया था। इसी बीच पैरेंट्स ने कहा कि एक बार आखिरी कोशिश करो तुम्हें सफलता जरूर मिलेगी। कोरोनाकाल में मैंने तीसरी और आखिरी कोशिश की। फाइनली नीट क्वालिफाई करके अब मैं डॉक्टर बनूंगी। ये कहानी है कोरबा के दीपका की रहने वाली अराधना जायसवाल की। जिसने बार-बार फेल होने के बाद भी हार नहीं मानी और अपने सपने को पूरा करके ही दम लिया। अराधना कहती है कि दूसरे लोगों का मोटिवेशन कुछ दिनों तक असर करता है, लेकिन अगर आपको सफल होना है तो खुद से मोटिवेट होना होगा। जब तक आपके अंदर सक्सेस तक पहुंचने की फीलिंग नहीं आएगी तब तक आप अपना सौ फीसदी नहीं दे पाओगे।
महज सात नंबर से चूक गई थी दूसरे प्रयास में
अराधना ने बताया कि नीट के लिए लगातार दो साल ड्रॉप लेना पड़ा। दूसरे प्रयास में मैं महज सात नंबर से नीट क्वालिफाई करने से चूक गई थी। ये मेरी लाइफ का सबसे मुश्किल समय था। सफलता मेरे सामने थी पर वहां से असफल होकर लौटना पड़ा। इस फेल्यिर से मैं बुरी तरह टूट गई थी। खुद को समझा नहीं पा रही थी कि इस सात नंबर के लिए पूरे एक साल मैं कैसे इंतजार करूंगी। कई बार ऐसा हुआ कि पढ़ाई छोड़कर खूब रोती थी। मन में बुरे-बुरे ख्याल भी आते थे कि पैरेंट्स ने कितना पैसा खर्च किया और मैं फेल हो गई। बाद में टीचर्स और दोस्तों ने काफी मोटिवेट किया जिसके बाद मैंने दोबारा तैयारी शुरू की। इस साल लॉकडाउन में खुद को हर रोज याद दिलाया कि मुझे नीट क्वालिफाई करना है। जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के बाद पूरा परिवार खुशी से झूम गया है।
सचदेवा के टीचर्स ने दी दोबारा पढ़ाई करने की हिम्मत
अराधना ने बताया कि 12 वीं के बाद नीट की तैयारी के लिए उनके रिश्तेदारों ने सचदेवा कोचिंग के बारे में बताया था। रिश्तेदार की बेटी सचदेवा में पढ़कर एमबीबीएस कर रही है। इसलिए पहले साल तैयारी के लिए सचदेवा पहुंच गई। यहां टीचर्स ने मेरी हर उन गलतियों को सुधारा जिसके कारण मैं टेस्ट और बाकी चीजों में पीछे रह जाती थी। फिजिक्स शुरू से वीक था। टीचर्स ने फिजिक्स की कई तरह से पढ़ाई कराई। जिससे मैं चीजों को जल्दी समझकर याद रख पाऊं। जब दूसरे अटेम्ट में कुछ नंबर से नीट क्वालिफाई नहीं कर पाई तो सचदेवा के टीचर्स ने तीसरी बार तैयारी के लिए बहुत हिम्मत दी। उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि तुम कर सकती हो।
जैन सर ने कहा था इंसान मेहनत से बदल सकता है किस्मत की लकीरेंसचदेवा के डारेक्टर चिरंजीव जैन सर हर सप्ताह बच्चों की काउंसलिंग करते थे। एक दिन उन्होंने हमारी काउंसलिंग करते हुए कहा था कि इंसान चाहे तो अपनी मेहनत से अपनी किस्मत की लकीरों को बदल सकता है। वे हमेशा छोटी – छोटी कहानियां सुनाकर हमें मोटिवेट किया करते थे। ग्रुप के अलावा जरूरत पडऩे पर बच्चों की पर्सनल काउंसलिंग करते थे। जो हमें डिप्रेशन और निराशा से बाहर निकाल देता था। इस साल जो स्टूडेंट नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे बस इतना ही कहना चाहूंगी कि जब भी निराश हो एक बार अपने पैरेंट्स के बारे में जरूर सोचे। हमेशा उनसे बात करें। कई बार छोटी – छोटी बातों को बड़ी बनाकर हम लक्ष्य से भटक जाते हैं। पैरेंट्स बातों -बातों में उन्हें सुलझाकर हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। (the states. news)

