नई दिल्ली, (mediasaheb.com) सरकार आगामी संसद सत्र में मुसलमानों में चल रही तीन तलाक से जुड़ी तलाक-ए-बिद्दत प्रथा को समाप्त करने के लिए लाए गए अपने पिछले अध्यादेश की जगह अब विधेयक लाने जा रही है। सरकार का कहना है कि इसमें कुछ बदलाव भी किए गए हैं। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें अध्यादेश की जगह विधेयक संसद में पेश किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नए विधेयक को सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की सोच के अनुरुप ही तैयार किया गया है। इसमें मुस्लिम महिलाओं को लैंगिक समानता और न्याय की बात कही गई है।उन्होंने कहा कि सरकार इससे पहले दो बार इससे जुड़ा अध्यादेश लाई है लेकिन राज्यसभा में इसके पारित नहीं होने के कारण यह निरस्त हो गए। विपक्ष इस पर कई तरह की आपत्तियां जताता रहा है और दोनों सदनों में इस पर कई तरह की चर्चाएं हुई हैं। सरकार ने प्रयास कर इन सुझावों को शामिल करने की कोशिश की है। सरकार की मंशा है कि मुस्लिम महिलाओं को फायदा मिले, कोर्ट में जाकर अगर मामला सुलझ सके तो सहमति बनाई जाए। इसके अलावा कोर्ट के पास यह अधिकार हो कि वह सुनवाई कर अपने अनुसार जमानत दे सके।
उल्लेखनीय है कि तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा के तहत मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को एक साथ तीन तलाक देता है, जिसे उच्चतम न्यायालय अवैध करार दे चुका है।(हि.स.)।


