रायपुर (mediasaheb.com)
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल
इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी
अध्यक्ष मगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोशी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीडिया प्रभारी
संजय चैबे ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को छोटे व्यापारियों का
चैम्पियन बताते हुए और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पियूष गोयल द्वारा ई कॉमर्स
के मुद्दे पर स्पष्ट एवं सख्त रूख रखने की सराहना करते हुए कन्फेडरेशन ऑफ ऑल
इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज श्री पीयूष गोयल को भेजे एक पत्र में देश के
व्यापारियों के व्यापार को ई कॉमर्स कंपनियों अमेजन एवं फ्लिपकार्ट से बचाने
के लिए की एफडीआई नीति, 2018 के प्रेस नोट नंबर 2 की जगह एक नया प्रेस
नोट तुरंत जारी करने का आग्रह किया है। कैट ने कहा है की अमेजन और फ्लिपकार्ट की
द्वारा सरकार की चेतावनी के बावजूद भी नियम एवं नीति का लागतगार उल्लंघन किया जा
रहा है। कैट के एतराज के बाद लगभग दो साल से एक नए प्रेस नोट की कवायद चल
रही हैं किन्तु इतना लम्बा समय बीत जाने के बाद भी प्रेस नोट का अभी तक जारी न होना
बेहद अचंभित करता है अब यह मामला बीरबल की खिचड़ी जैसा हो गया है। प्रधानमंत्री
श्री नरेंद्र मोदी के ष्न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासनष् के दृष्टिकोण को सरकारी
अधिकारियों द्वारा पूरी तरह से अनदेखा किया गया है।
कैट के
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी ने श्री गोयल को भेजे पत्र में कहा कि देश
भर के व्यापारी यह समझ नहीं पा रहे हैं की श्री गोयल द्वारा विभिन्न सार्वजनिक
प्लेटफार्मों पर की गई विभिन्न घोषणाओं कि नीति और कानून का उल्लंघन करने की
अनुमति किसी को नही दी जाएगी, फिर भी ये कंपनियां पिछले तीन वर्षों से एफडीआई नीति और कानून
की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही हैं और किसी भी सरकारी विभाग ने उनके खिलाफ कोई
कार्रवाई ही नहीं की है। विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियां लगातार एफडीआई नीति के
प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर रही हैं और यहाँ तक की जिन मामलों में जांच की भी
आवश्यकता है, फिर भी उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसा
प्रतीत होता है की सरकार की नए प्रेस नोट जारी करने की मंशा और ई-कॉमर्स नीति को
लागू किया जाने की सोच को सरकारी प्रशासन प्रेस नोट न लाकर, दबाने की कोशिश कर
रहा है।
कैट
सी.जी.चैप्टर के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्री विक्रम सिंहदेव ने कहा कि खुदरा
व्यापार को विनियमित और उस पर निगरानी करने के लिए एक ई-कॉमर्स नीति तैयार करने
तथा एक रेगुलेटरी अथॉरिटी के गठन की मांग को 2019 से नजर अंदाज किया जा रहा है जिसको देखते
हुए व्यापारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि ई- कॉमर्स जो भारत में भविष्य में
व्यापार का तरीका है उसकी कभी भी ई-कॉमर्स नीति नहीं होगी क्योंकि भारत का रिटेल
व्यापार जो 115 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार कर रहा है के लिए भी आज तक
कोई नीति नहीं बनी है।
श्री पारवानी
और श्री सिंहदेव ने आगे कहा कि डीपीआईआईटी अमेजॅन और वॉलमार्ट के खिलाफ कड़ी
कार्रवाई करने में पूरी तरह फेल हो गया है। सीधे तौर पर बड़ी ई कॉमर्स कंपनियों और
छोटे व्यापारियों दोनों पर कानून की पालना का मापदंड स्पष्ट रूप अलग-अलग है। अगर
यह देश के एक छोटे व्यापारी का मामला होता, तो हमें यकीन है कि कई एजेंसिया कार्रवाई करने आगे आती और वह भी
बिना सुनवाई का मौका दिए। ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने नीति और कानून के विभिन्न
मानक बना रखे हैं।
श्री पारवानी
और श्री सिंहदेव ने कहा कि अमेजॅन और फ्लिपकार्ट द्वारा इक्विटी नियंत्रण या
आर्थिक भागीदारी के माध्यम से अपनी खुद की कंपनियों का एक जटिल मकड़जाल है, जहाँ पर ये कंपनियां
बेहद सुविधापूर्वक पूंजी डंपिंग करती है। ये कंपनियां अपने श्कुछ पसंदीदा
विक्रेताओंश् के द्वारा लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, बड़े डिस्काउंट देना, इन्वेंट्री को
नियंत्रित करना और ई-कॉमर्स को असमान स्तर के खेल के मैदान मे तब्दील करना सब दिन
के उजाले में किया जा रहा हैं , जिसे अनेको बार कैट ने सरकार के ध्यान में लाया है। पिछले तीन
वर्षों से अधिक समय बीत गया है लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है और देश के
व्यापारियों को बेरहमी से ई-कॉमर्स संस्थाओं के गंभीर हमले को सहन करने के लिए छोड़
दिया गया है।
न्यायशास्त्र
की महत्वपूर्ण रेखा को कि ष्न्याय में देरी न्याय से वंचित होनाष् है, को उद्धत करते हुए
कैट ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश के व्यापारियों ने इन संस्थाओं के खिलाफ अपनी
लड़ाई जारी रखने का दृढ़ संकल्प लिया है और उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी का दूसरा
संस्करण नहीं बनने देंगंे।(the states. news)
Monday, April 6
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