एक साल ड्रॉप लेकर चार मेडिकल एंट्रेस क्लीयर करने वालीं ये हैं डॉ. पूर्णिमा, पढि़ए सफलता की कहानी
भिलाई. (mediasaheb.com) 12 वीं बोर्ड के साथ पहले ही अटेम्ट में कुछ नंबरों से मेडिकल सीट चूकने वाली भिलाई की डॉक्टर पूर्णिमा ने एक साल ड्रॉप लेकर ऐसी तैयारी कि उन्होंने देश के एक नहीं बल्कि चार कठिन मेडिकल एंट्रेस क्वालीफाई कर लिया। सोचने में भले की अजीब लगे लेकिन इसे सच कर दिखाने वाली डॉक्टर पूर्णिमा ढंडाले आज गुजरात के वड़ोदरा के सबसे बड़े अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। शुरुआत में कैरियर सलेक्शन में इन्हें भी बहुत दिक्कत हुई। डॉ. पूर्णिमा ने बताया कि वो बचपन से होनहार स्टूडेंट थी। इसलिए 11 वीं में बायो-मैथ्स साथ लेकर पढ़ाई की। 12 वीं बोर्ड के बाद इंजीनियरिंग और मेडिकल दोनों ही फील्ड के एंट्रेस एग्जाम दिए। इंजीनियरिंग में सलेक्शन हो गया लेकिन मेडिकल सीट हासिल नहीं कर पाई। कुछ दिनों तक समझ नहीं आया क्या करना चाहिए फिर इसी बीच इंजीनियरिंग कॉलेज में भी एडमिशन ले लिया। कुछ दिनों बाद लगा कि एक साल ड्रॉप लेकर फिर से ऑल इंडिया पीएमटी की तैयारी करनी चाहिए। कड़ी मेहनत का ही परिणाम था ड्रॉप का रिस्क आखिर कामयाब रहा। जब रिजल्ट आया तो सीपीएटी, गुजरात पीएमटी, महाराष्ट्र पीएमटी के अलावा एम्स के लिए भी एक साथ क्वालिफाई कर लिया। नागपुर के मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेकर एमबीबीएस की पढ़ाई की।
ड्रॉप इयर में लगता था डर
डॉ. पूर्णिमा ने बताया कि ड्रॉप इयर में वो काफी डरी हुई थीं। बार-बार मन में यही ख्याल आता था कि यदि सलेक्शन नहीं हुआ तो फिर क्या करूंगी फिर भी खुद को समझाकर पढ़ती चली गई। एक साल कोचिंग और सेल्फ स्टडी से आत्मविश्वास आया। जिसके बाद एक साथ कई एग्जाम भी दिए और सभी एग्जाम में क्वालीफाई भी कर लिया। बचपन में जब बार-बार बीमार होकर डॉक्टर के पास जाती थी तो लगता था कि मैं भी बड़ी होकर लोगों को दवा दूंगी। बायो और मैथ्स दोनों में इंटरेस्ट के कारण थोड़ी कन्फ्यूज हो गई। आज जब अपने फैसले को पीछे पलटकर देखती हूं तो लगता है शायद मैं डॉक्टर बनने के लिए ही पैदा हुई हूं। कोरोनाकाल में जिस तरह से हमने महामारी से लड़ा उससे खुद के फ्रंट लाइन वारियर होने पर गर्व होता है।
जब नंबर कम आया तो जैन सर ने खुद बुलाकर की काउंसलिंग
डॉ. पूर्णिमा ने बताया कि साल 2002 में जब मेडिकल एंट्रेस के लिए कोचिंग करने का सोचा तो उस वक्त सचदेवा अपने बेस्ट रिजल्ट के लिए जाना जाता था, जो आज भी कायम है। मैंने पैरेंट्स के साथ जाकर वहां एडमिशन ले लिया। बायो-मैथ्स बैकग्राउंड के कारण बायो की डीप नॉलेज में थोड़ी कमी रह गई थी। सचदेवा के टीचर्स हर डाउट क्लीयर कर देते थे। फिजिक्स में जहां दिक्कत होती वहां ऐसे ट्रिक्स टीचर्स ने सिखाए जो आज भी याद है। एक बार टेस्ट सीरिज में मेरे बहुत कम नंबर आए। तब सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने पर्सनली बुलाकर मुझसे पूछा, मेरी काउंसलिंग की। साथ ही हौसला बढ़ाया कि कम नंबर आने से दु:खी होने की बजाय जमकर मेहनत करो। उस दिन लगा कि पढ़ाई के साथ-साथ एक स्टूडेंट को काउंसलिंग की कितनी जरूरत होती है।
टाइम मैनेजमेंट करना सीखे
इस साल जो बच्चे नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे कहूंगी कि आप पढ़ाई के साथ-साथ टाइम मैनेजमेंट करना सीखें। आपको सबकुछ आ रहा है लेकिन एग्जाम हॉल में टाइम मैनेज नहीं किया तो सारी तैयारी जाया हो जाएगी। सवाल आते हुए भी छूट जाते हैं। जो भी करना चाहते हैं उसके लिए फोकस होकर तैयारी करो। जरूरत पड़ी तो किसी अच्छे मार्गदर्शक से सलाह भी ले सकते हैं। निराश होने की बजाय सिर्फ मन लगाकर पढ़ें क्योंकि एक-एक सीढ़ी ही आपको आगे बढ़ाती है।(the states. news)

