सोशल मीडिया को न कहकर एक साल केवल पढ़ाई पर फोकस करने वाली स्मृति ने किया नीट क्वालिफाई
भिलाई(mediasaheb.com) बचपन से होनहार छात्रा रही अंबिकापुर की स्मृति सिंह का केवल एक ही सपना था नीट क्वालिफाई करके डॉक्टर बनना। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक साल तक सोशल मीडिया को न कहकर केवल पढ़ाई पर फोकस किया। जिसका नतीजा ये रहा कि स्मृति ने न सिर्फ नीट क्वालिफाई किया बल्कि अच्छे माक्र्स के चलते उन्हें अपने होम टाउन यानी अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज में ही दाखिला मिल गया। एक साल ड्रॉप लेकर अपने दूसरे अटेम्ट में एमबीबीएस सीट हासिल करने वाली स्मृति कहती है कि असफलता और सफलता के बीच केवल अ का फर्क होता है। जिसे इंसान जब चाहे हार्ड वर्क करके दूर कर सकता है। मैंने इसी फर्क को समझकर अपना पूरा समय केवल पढ़ाई को दिया जिसका नतीजा सबके सामने है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी स्मृति का मानना है कि डॉक्टरी एक ऐसा प्रोफेशन है जो नाम के साथ आपको समाज में एक अलग दर्जा देता है। लोग आज भी डॉक्टर को भगवान मानते हैं। जो शायद किसी और दूसरे जॉब में नहीं होता। इसलिए मेरा झुकाव हमेशा इसी फील्ड पर रहा।
खुद को नहीं देना चाहती थी फेल होने का कोई रीजन
घर की बड़ी बेटी होने के नाते पापा ने मुझे बड़ी उम्मीदों से पढ़ाई करने के लिए भिलाई भेजा था। स्मृति ने बताया कि जब वो भिलाई पहली बार आई तो यहां के माहौल में काफी अंतर पाया। ऐसे में लक्ष्य के करीब पहुंचने के लिए हर उस चीज को आंखों से दूर रखा जिससे ध्यान भटक सकता था। मैं खुद को फेल होने के कोई रीजन नहीं देना चाहती थी। इसलिए एक साल तक घूमने-फिरने, मौज-मस्ती का ख्याल भी दिल में नहीं आया। हॉस्टल से कोचिंग और कोचिंग से हॉस्टल, बाकी समय पढ़ाई में कट गया। बीच-बीच में जब निराश होती थी तो घर में पैरेंट्स से बात करती थी। वो हमेशा कहते हैं कि रिजल्ट की चिंता मत करो बस कोशिश करते रहो। उनकी बातें सुनकर फिर पढ़ाई करने बैठ जाती थी।
बेटर स्कोर करने के लिए कैमेस्ट्री पर किया फोकस
स्मृति ने बताया कि बायो और एग्रीकल्चर के साथ उन्होंने 12 वीं बोर्ड पास किया। बायो स्टूडेंट होने के कारण कैमेस्ट्री और फिजिक्स थोड़ा वीक था। इसलिए मैंने शुरूआत से बेटर स्कोर करने के लिए कैमेस्ट्री पर ज्यादा फोकस किया। सचदेवा कोचिंग के बारे में पापा के दोस्तों से पता चला। उन्होंने गाइड करते हुए जो सचदेवा के बारे में बताया उससे कहीं ज्यादा अनुभवी टीचर्स को पाकर खुश हो गई। कोचिंग में टीचर्स हर डाउट को चंद मिनटों में दूर करते देते थे। अगर किसी कारण डाउट नहीं पूछ पाए तो डाउट के लिए अलग से 15 मिनट का समय या फिर डाउट क्लास लगती थी, जिससे काफी हेल्प मिला। गेस्ट सेशन में सचदेवा से पढ़कर देश-विदेश में नाम कमा कर रहे मशहूर डॉक्टरों से मिलकर लगा कि ये जब कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं। हर डॉक्टर के संघर्ष की एक अलग कहानी रोमांचित कर देती थी।
जैन सर की काउंसलिंग आई बहुत काम
स्मृति ने बताया कि सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग उनके बहुत काम आई। जैन सर की काउंसलिंग क्लास में बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पर्सनल प्राब्लम भी शेयर करते थे। बड़ी आसानी से सर हमें उसे परेशानी से निकलने का रास्ता बताते थे शायद किसी और कोचिंग में ऐसा मेंटर मिलना बहुत मुश्किल है। उनकी मोटिवेशन बातें हमेशा हमें आगे बढऩे की प्रेरणा देती है। नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहूंगी कि एग्जाम हॉल में जल्दबाजी की जगह धैर्य से काम ले। केवल उन्हीं प्रश्नों पर टिक करें जिसके उत्तर आप जानते हो नहीं तो नेगेटिव मार्किंग से पूरा पेपर भी बिगड़ सकता है।(the states. news)

