ग्वालियर
ग्वालियर शहर का मान कहे जाने वाले ऐतिहासिक व्यापार मेले का शुभारंभ हुए एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन मेले का सबसे मुख्य आकर्षण आटोमोबाइल सेक्टर फिलहाल सन्नाटे की आगोश में है। 25 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मेले के भव्य उद्घाटन के बाद उम्मीद थी कि आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट की घोषणा तत्काल हो जाएगी, लेकिन शासन स्तर पर हो रही देरी ने कारोबारियों और खरीदारों दोनों के उत्साह पर पानी फेर दिया है। आलम यह है कि शोरूम्स पर गाड़ियां तो सजी हैं, लेकिन उनकी बिक्री का पहिया पूरी तरह थम गया है।
पिछले तीन साल से हो रही है टैक्स छूट मिलने में देरी
ग्वालियर व्यापार मेले में आरटीओ टैक्स छूट देरी से दिए जाने का सिलसिला पिछले तीन सालों से जारी है। 2022-23 में आरटीओ टैक्स छूट का नोटीफिकेशन मेला शुरू होने से दो दिन पहले ही आ गया था। लेकिन इसके बाद 2023-24, 2024-2025 में जनवरी मध्य यानि मकर संक्राति तक ही 50 प्रतिशत छूट आरटीओ टैक्स में मिल पाई। यानि मेला शुरू होने के बीस दिन बाद। अब व्यापार मेला 2025-26 को शुरू हुए भी 10 दिन हो गए हैं। लेकिन अभी तक टैक्स छूट का नोटीफिकेशन जारी नहीं हुआ है।
क्या असर होता है मेले पर
छूट में में देरी होने से वाहनों की बिक्री भी कम होती है और जिससे कारोबारियों को तो नुकसान होता है, शासन को भी राजस्व का नुकसान होता है।
ग्वालियर व्यापार मेले का मुख्य आकर्षण ऑटोमोबाइल सेक्टर है। इस सेक्टर में रौनक ही टैक्स छूट मिलने के बाद आती है। दूसरे टैक्स छूट न मिलने से आटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार भी प्रभावित होता है।
बुकिंग वाले वाहनों की डिलिवरी न होने से शोरूम मालिक डिमांड के मुताबिक कारों का स्टाक नहीं मंगा पा रहे हैं।
यह भी बताई जा रही वजह
2023-24 में ग्वालियर के साथ उज्जैन में विक्रम व्यापार मेला की शुरूआत हुई थी। जब जनवरी मध्य में ग्वालियर के लिए छूट मिली थी तभी मार्च से शुरू होने वाले विक्रम व्यापार मेला के लिए छूट जारी हो गई। 2024-2025 में भी जनवरी मध्यम में ग्वालियर के साथ ही उज्जैन मेले के लिए टैक्स छूट का नोटीफिकेशन जारी हुआ था। इसके पीछे बताया जाता है कि इसके पीछे उज्जैन मेला को प्रमोट करना अधिक है। ऐसे में ग्वालियर मेले के लिए टैक्स छूट देरी से दी जा रही है।
बुकिंग की कतार, डिलीवरी कम
सैकड़ों लोगों ने अपनी पसंद की कारों और दोपहिया वाहनों की बुकिंग करा ली है, लेकिन कोई भी डिलीवरी लेने को तैयार नहीं है। सभी को आरटीओ टैक्स की 50 प्रतिशत की छूट का इंतजार है। यही वजह है कि पिछले चार दिनों में नाममात्र के वाहनों की ही बिक्री हुई है।


