नई दिल्ली
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि डिफेंस सेक्टर में भारत के लिए आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है और इसके लिए देश किसी विदेशी आपूर्ति पर निर्भर नहीं रह सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं है। उन्होंने कहा, 'कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल हित स्थायी होते हैं। वैश्विक स्तर पर अभी व्यापार के लिए युद्ध जैसी स्थिति है।' उन्होंने कहा कि विकसित देश तेजी से संरक्षणवादी हो रहे हैं, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार हवाई सुरक्षा प्रणाली सुदर्शन चक्र के तहत अगले 10 वर्षों में देशभर के सभी अहम स्थलों को पूरी तरह हवाई सुरक्षा मुहैया कराने की योजना बना रही है। एनडीटीवी डिफेंस समिट में अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है, जो दुश्मन के किसी भी हमले से बचाव करने और उसका जवाब देने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा, 'जैसा कि हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा आज की लड़ाइयों में हवाई सुरक्षा की अहमियत बहुत बढ़ गई है। ऐसे में सुदर्शन चक्र मिशन एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा।'
एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। यह ऐलान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ओर से भविष्य में दोनों देशों के बीच किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में सीमा पर भारतीय संपत्तियों को निशाना बनाने के संकेतों के कुछ दिन बाद हुई थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात ने यह साफ कर दिया है कि अब रक्षा क्षेत्र में बाहरी देशों पर निर्भर रहना कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, 'आज की स्थिति में आत्मनिर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।'
आर्थिक ढांचे की सुरक्षा पर भी बयान
रक्षा मंत्री ने कहा, 'आज रक्षा क्षेत्र केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव नहीं है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उसके भविष्य को सुरक्षित करने का एक प्रमुख आधार भी बन गया है।' उन्होंने कहा कि यह केवल लोगों की सुरक्षा, जमीन की हिफाजत या सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे आर्थिक ढांचे की सुरक्षा और स्थिरता की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को संरक्षणवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का संबंध संरक्षणवाद से नहीं है, बल्कि यह हमारी संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वायत्तता और आत्मविश्वास का मुद्दा है।'