नई दिल्ली
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले आम आदमी पार्टी ने वायु प्रदूषण और खराब हवा को लेकर परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजधानी के लोग पिछले कई महीनों से जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार समस्या को हल करने के बजाय आंकड़ों से छेड़छाड़ कर रही है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पिछले चार महीनों से दिल्ली के लोग ठीक से सांस तक नहीं ले पा रहे हैं। दिल्ली के बच्चे घुटन महसूस कर रहे हैं और बुजुर्गों की जान खतरे में है।
एम्स जैसे बड़े अस्पताल भी कह रहे हैं कि दिल्ली में रहना मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन दिल्ली सरकार क्या कर रही है? सरकार एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई मापने वाले मॉनिटरों में हेरफेर कर रही है।" आतिशी ने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक स्थिति छिपाकर लोगों को गुमराह कर रही है। इस बीच, दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने विधानसभा सत्र को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह सत्र दिल्ली विधानसभा का एक महत्वपूर्ण सत्र है। मंत्री आशीष सूद ने आईएएनएस से बताया, "सरकार इस सत्र में अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को सदन के सामने रखेगी। सरकार के कामकाज और योजनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी।"
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने पलटवार कर पूर्व सरकार पर निशाना साधा। भाजपा विधायक सूर्य प्रकाश खत्री ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को दिल्ली की जनता के सामने लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "सीएजी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पिछली सरकार की गलतियों और गड़बड़ियों का सच सामने आ सके। यह हमारी जिम्मेदारी है, नहीं तो दिल्ली की जनता कैसे जानेगी कि पिछले 11 वर्षों में उन्हें किस तरह की परेशानियों और धोखे का सामना करना पड़ा?"
भाजपा विधायक चंदन कुमार चौधरी ने भी पूर्व सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार दिल्ली को एक आधुनिक और विकसित शहर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है, लेकिन पूर्व सरकार घोटालों में उलझी रही। आज पेश की जाने वाली सीएजी रिपोर्ट में उन घोटालों का पूरा ब्योरा सामने आएगा। दिल्ली विधानसभा के इस शीतकालीन सत्र में एक तरफ जहां 'आप' प्रदूषण को लेकर सरकार को घेर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा सीएजी रिपोर्ट के जरिए पूर्व सरकार की जवाबदेही तय करने की बात कर रही है।


