बेजिंग
मेडिकल साइंस ने बड़ी छलांग लगाई है। चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ब्रेन डेड मरीज के शरीर में जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर का फेफड़ा ट्रांसप्लांट किया। यह ऐतिहासिक प्रयोग ग्वांगझोउ मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने किया।39 साल के ब्रेन डेड व्यक्ति पर यह ट्रांसप्लांट किया गया। ऑपरेशन के बाद फेफड़ा कुछ समय तक काम करता रहा, लेकिन 24 घंटे के भीतर इसमें नुकसान दिखने लगा। 3वें और 6वें दिन शरीर में एंटीबॉडी बनने लगीं, जिसने फेफड़े को नुकसान पहुंचाया। 9वें दिन सूअर का फेफड़ा शरीर से हटा दिया गया।
वैज्ञानिकों के अनुसार, फेफड़े का ट्रांसप्लांट हार्ट और किडनी की तुलना में कहीं ज्यादा जटिल है।हर सांस के साथ फेफड़े का सीधा संपर्क बाहरी वातावरण, वायरस, एलर्जन और प्रदूषण से होता है। इसी कारण इम्यून रिएक्शन और अंग अस्वीकृति (rejection) का खतरा ज्यादा रहता है।भले ही यह फेफड़ा पूरी तरह सफल न रहा हो, लेकिन यह प्रयोग जेनेटिक साइंस और अंग प्रत्यारोपण की दुनिया में नई राह खोल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में सूअर जैसे जानवरों से इंसानों के लिए अंग तैयार करना संभव हो सकेगा।
Friday, October 16
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