भोपाल
भोपाल में भोज वेटलैंड व भदभदा, कलियासोत, मदन महल हिल्स में अतिक्रमण हटाए जाने हैं। मंडला में चुटका मप्र एटॉमिक पावर प्लांट, छतरपुर में डायमंड ब्लॉक लीज परियोजना, न्यू सिंगरौली कोयला खदान परियोजना से 1.30 लाख लोग प्रदेश में बेघर हो सकते हैं।
विकास में बाधक बने घर हटाए
– 2023 में झुग्गी-झोपड़ी, अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के तहत 90 घर तोड़े। इन्हीं वजह से 2022 में 489 घर व दुकानें तोड़ी गईं।
– 2023 में कई परियोजनाओं में आड़े आ रहे 390 अन्य घर खाली कराए। इंदौर में 157 घर पीएम आवास योजना में बने थे।
-2022 में ऐसे 245 घर थे। 127 सबसे ज्यादा मच्छी बाजार में खाली।
– 2022 में एमपी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 5 गांव में 175 घर खाली कराए। ये रिजर्व के कोर क्षेत्र में थे। एक घर खरगोन में हटाया गया।
देशभर में चला नया ट्रेंड लेकिन…
बता दें कि देश के कोने-कोने में इस समय जघन्य अपराधों में लिप्त आरोपियों, अपराधियों और आतंकियों के घर तोड़े जा रहे हैं। यह नया ट्रेंड जरूर है, लेकिन अतिक्रमण हटाने से लेकर विकास परियोजनाओं तक के लिए 2017 से 2023 के बीच यानी सात वर्ष में कम से कम 3.44 लाख मकान तोड़े जा चुके हैं। इन्हीं वजहों से अभी और करीब 1.7 करोड़ लोगों के घर टूटने के जोखिम पर हैं।
हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क संगठन द्वारा जुटाई जानकारियों के अनुसार सात साल में हुई कार्रवाइयों की वजह से करीब 16 लाख लोग बेघर हुए, जिनमें से अधिकतर के लिए सरकारी स्तर पर विस्थापन योजनाएं भी बनाई गईं हैं। 2023 में भारत में कुल 1,07,499 और 2022 में 46,371 मकान तोड़े गए। इसके जरिए दोनों वर्षों में क्रमश: 5,15,752 और 2,22,686 लोगों को घरों से निकाला गया।


