कच्चे तेल के दाम फिर घटे मगर केंद्र की पेट्रोल-डीजल में मुनाफाखोरी बरकरार- कांग्रेस

Crude oil prices fall again but center's profiteering in petrol and diesel continues - Congress

मोदी सरकार की नीयत मुनाफाखोरी की जनता को राहत देना नहीं

रायपुर(media saheb.com)  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत फिर से एक बार कम हुई है मगर केंद्र सरकार अपनी मुनाफाखोरी के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई लगाम नहीं लगा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि नवंबर में क्रूड आयल का दाम 80.64 डॉलर प्रति बैरल था जिसके मुकाबले अभी 73.30 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। अगर क्रूड आयल के दाम के अनुरूप पेट्रोल के दाम घटाए जाएं तो पेट्रोल लगभग 8 रु और डीजल लगभग 7 रु सस्ता हो जाएगा मगर केंद्र सरकार और तेल कंपनियों द्वारा की जा रही सामूहिक लूट से जनता परेशान हो चुकी है। मोदी सरकार की नीयत जनता को राहत देने की है ही नहीं उसकी प्राथमिकता जनता से कर वसूल कर मुनाफा कमाने की है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि केंद्र सरकार को जनता की जेब कि नहीं अपने मुनाफे और उद्योगपतियों की तिजोरी की चिंता है। क्रूड आयल के घटते दामों के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल का गणित मोदी सरकार को छोड़ किसी को समझ नहीं आ रहा है। पिछली बार केंद्र सरकार ने जनता पर ऐहसान लादने के लिए पेट्रोल और डीजल पर 5रु और 10रु एक्साइज ड्यूटी घटा कर पल्ला झाड़ लिया था। पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों को उफान पर पहुंचाने के लिए केवल और केवल मोदी सरकार जिम्मेदार है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि केवल दो चार उद्योगपतियों की उंगलियों पर बेशर्मी से नाच रही केंद्र की मोदी सरकार को देश की 135 करोड़ जनता से कोई सरोकार नहीं है।बढ़ती महंगाई के कारण उत्पादन घट रहा है, हर रोज किसी न किसी उपक्रम पर ताला लग रहा है, हर रोज सैकड़ों लोग बेरोजगार हो रहे हैं। देश में गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी ने उत्पात मचा रखा है, मगर जनता से झूठ बोलकर केंद्र में बैठी भाजपा सरकार सिर्फ उद्योगपतियों को राहत देने में लगी है। देश में हर रोज गरीबों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, भाजपा देश को आजादी के तुरंत बाद वाली उस स्थिति में लाना चाहती है, जब लोगों के पास खाने के लिए अनाज और पहनने के लिए कपड़ा नहीं था। मोदी सरकार कपड़ा, जूतो अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाकर अपनी तिजोरी भरने में लगी है। उसे जनता की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है।

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