पटना.
सामाजिक दायित्व निभाने के लिए राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थान अब पांच-पांच गांव गोद लेंगे। इस संबंध में राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) Syed Ata Hasnain ने ‘उन्नत भारत अभियान’ के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देश के अनुसार, 13 विश्वविद्यालय कुल 65 गांव गोद लेंगे, जबकि 250 अंगीभूत महाविद्यालय 1250 गांवों को अपनाएंगे।
1315 गांवों में होंगे विकास कार्य
इस तरह कुल 1315 गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्द्धन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके। 30 मार्च को कुलपतियों की बैठक के बाद राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा द्वारा सभी विश्वविद्यालयों को कार्यवाही रिपोर्ट भेजी गई है। इसके तहत हर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अपने कार्यक्षेत्र के कम-से-कम पांच गांव गोद लेकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाएंगे। इससे छात्रों में समाज-सेवा की भावना विकसित होगी और शहरी विद्यार्थी ग्रामीण जीवन से परिचित हो सकेंगे।
गांवों में छात्रों के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही प्रत्येक छात्र गोद लिए गए गांव में एक पौधा लगाएगा। उनकी देखभाल भी करेगा। इन गांवों की एंट्री ‘समर्थ पोर्टल’ पर दर्ज की जाएगी, जबकि किए जा रहे कार्यों की मॉनिटरिंग बिहार लोक भवन सचिवालय स्तर से होगी।
प्रदर्शन के आधार पर होगी ग्रेडिंग
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब विश्वविद्यालयों की ग्रेडिंग उनके प्रदर्शन के आधार पर की जाएगी। इसके लिए ग्रेडिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाया जाएगा। मूल्यांकन में प्रोफेसरों की रिसर्च, पेटेंट, प्रोजेक्ट्स, इनोवेशन, पाठ्यक्रम सुधार, टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधार जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह लागू की जाएगी। इसके तहत भौतिक डिग्रियों और अंकपत्रों को स्कैन कर डिजिटल लॉकर-नैड पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।


