सहरसा.
बिहार के सहरसा जिले में बीपीएससी उत्तीर्ण शिक्षक भी फर्जी साबित होने लगे हैं। जिले में पिछले तीन-चार वर्षों में बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा ली जा रही प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर शिक्षकों का चयन किया जा रहा है। ऐसी हालत में जिले में टीआरई एक से तीन तक करीब चार हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गयी। इन नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में कई अनियमितता सामने आयी है।
कई फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर संकट उत्पन्न हो गया है। बीपीएससी उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमाण पत्रों में मिली गड़बड़ी के आधार पर यह तो तय हो गया कि शिक्षा माफिया का तंत्र व तकनीक उच्च शिक्षा आयोग तक फैला हुआ है। इससे पूर्व वर्ष 2012-15 के बीच प्रमाण पत्र के आधार पर पहले आओ पहले पाओ के तर्ज पर शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। उस समय में फर्जी शिक्षक चिह्नित किए गए। इधर, अब बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षा आयोजित करनेवाले विद्यालय अध्यापकों में भी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नैया पार करने वालों की खोज विभाग ने अब शुरू कर दी है। लगातार प्रमाण पत्रों के सत्यापन का कार्य चल रहा है।
BPSC से बहाल हुए 3895 विद्यालय अध्यापक
बिहार लोक सेवा आयेाग द्वारा प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कर विद्यालयों में 3895 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी। जिले में टीआरई 1, टीआरई 2 और टीआरई 3 में कुल मिलाकर शिक्षकों की नियुक्ति हुई, जिसमें टीआरई 1 में 1758, टीआरई 2 में 1169 एवं टीआरई 3 में 968 विद्यालय अध्यापक नियुक्त किए गए। इन सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कार्य शुरू होने से शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। अभी हाल ही में कंप्यूटर विज्ञान विद्यालय अध्यापकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में करीब दो दर्जन से अधिक विद्यालय अध्यापकों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। सबों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब विभाग इन शिक्षकों के विरूद्ध कार्रवाई करने के मूड में है।
जांचोपरांत विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी –
बीपीएससी से उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमाण पत्रों में अनियमितता बरतने की शिकायत मिल रही है जिसकी जांच कराई जा रही है। जांचोपरांत विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
-हेमचंद्र, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहरसा


