नई दिल्ली, (mediasaheb.com)। अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्थेर डूफ्लो ने कहा कि वे बहुत खुश और अभिभूत हैं कि उनके गरीबी उन्मूलन सम्बन्धी शोध को मान्यता मिली।” एस्थेर यह सम्मान पाने वाली दूसरी सबसे कम आयु की अर्थशास्त्री हैं।
अभिजीत बनर्जी ने कहा कि गरीबी उन्मूलन सम्बन्धी शोध अर्थशास्त्र सम्बन्धी अध्ययन में हाशिये पर था। हमने मैसाच्यूट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के अपने संस्थान में इस विषय पर अध्ययन और शोध किया। हमारे शोध को नोबेल पुरस्कार के माध्यम से स्वीकृति मिली है जिससे इस क्षेत्र में आगे अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।
अभिजीत दम्पती को अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिए जाने वाले स्वेरिंगस रिक्सबैंक पुरस्कार के लिए चुना गया है। उनके साथ एक अन्य अर्थशास्त्री हार्वर्ड विश्वविद्यालय के माइकल क्रेमर को भी यह सम्मान दिया गया है।
बनर्जी ने कहा कि यह पुरस्कार अद्भुत है, जीवन में इस तरह का अवसर कभी कभी आता है।बनर्जी ने अपनी पत्नी के साथ एमआईटी में अब्दुल लतीफ़ पावर्टी एक्शन लैब की स्थापना वर्ष 2003 में की थी। इस लैब के माध्यम से उन्होंने विकासपरक अर्थशास्त्र पर अध्ययन और शोध को आगे बढ़ाया। उन्होंने गरीबी से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि,और महिला-पुरुष समानता आदि पहलुओं का भी अध्ययन किया। साथ ही उन्होंने गरीबी उन्मूलन के लिए व्यावहारिक योजनाओं को भी उजागर किया।
अभिजीत दंपती ने अपने शोध के लिए भारत और अफ्रीका के देशों को चुना था। एक अध्ययन में उन्होंने पाया कि जब भारत में टीकाकरण अभियान की सफलता का एक मुख्य कारण यह था कि ग्रामीणों को प्रोत्साहन स्वरूप खाद्यान्न दिया गया। उनका यह भी मानना है कि गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों की सफलता के लिए जरूरी है कि सरकार के साथ ही स्वयंसेवी और सामाजिक संस्थाएं भी इनके साथ जुड़ें। बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने जमीनी स्तर पर अभियान चलाये जाने के सुझाव दिया है। ग्रामीण स्तर पर चिकित्सकों की दक्षता बढ़ाने को भी वे बहुत जरूरी मानते हैं। (हि.स.)


