अपनी गोद में अनेक विशेषताएं समेटे हुए है कोटमसर की हरी गुफा

जगदलपुर(हि.स.) बस्तर प्रकृति की अनुपमछटा से अटी पड़ी है। यहां के झील, झरने और गुफाएं देश और विदेश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करतीहै। ऐसी ही एक रमणीय हरी गुफा कांगेर घाटी में स्थित कोटमसर गांव से करीब सात किमीदूर घने जंगलों के बीच में स्थित पहाड़ी पर है। इस गुफा के राज अभी तक बाहर नहीं आपाए हैं। इस हरी गुफा के पहले कक्ष में मौजूद लाइम स्टोन हरीतिमा लिए हुए है। गुफामें प्रवेश करने के बाद दाईं और बाईं तरफ भी अन्य कक्ष हैं। हरी गुफा की सबसे बड़ीखासियत इसका हरा होना तो है ही इसके अलावा ये बस्तर की एकमात्र ऐसी गुफा है। जहांदोपहर बाद कुछ देर के लिए सूरज की रोशनी अन्दर आती है। घने जंगलों के बीच मौजूद इसगुफा के प्रथम कक्ष में छतों से लटकते स्टेग्लेटाइट के नमीयुक्त पत्थरों पर सूरजका प्रकाश पड़ता है और नमीयुक्त चट्टानों पर शैवाल उग आते हैं। इन्हीं शैवालों कीवजह से ये चट्टानें हरी दिखाई पड़ती हैं। हालांकि अभी इस गुफा पर रिसर्च नहीं होपाया है लेकिन गुफा विज्ञानी ने पहली जांच में गुफा के हरे होने का कारण यही बतायाहै। पीजी कॉलेज के भू-गर्भ विज्ञान के प्रोफेसर अमितांशु शेखर झा ने शनिवार कोबातचीत में बताया कि इस पूरे इलाके में करीब 13-14 गुफाएं हैं। इनकी जानकारी स्थानीयग्रामीणों के अलावा किसी को नहीं है। इनमें से सिर्फ 5 गुफाओं में ही कामहो पाया है। हरी गुफा पर अभी शोध होना बचा है। उन्होंने बताया कि बारिश में गुफाके अंदर जाना खतरनाक होता है। कोटमसर और इसके आसपास रहने वाले लोग इस गुफा के अंदरमौजूद स्टेग्लेटाइट को देवता मानते हैं। यहां 30 फीट लंम्बाई वाली स्टेग्लटाइट को देवतामानकर वर्ष में एक बार पूजा की जाती है। वहीं गुफा को देवस्थली माना जाता है। इसगुफा को अभी आम पर्यटकों के लिए नहीं खोला गया है। 

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